पूर्वांचल: मोदी जी, आउटर पर ही खड़ी रही उम्मीदों की ट्रेन!
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प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र पूर्वांचल में होने के वजह से इस क्षेत्र को रेल बजट से बहुत उम्मीदें थीं। रेल बजट पेश हुआ तो ‘मोदी एक्सप्रेस’ उम्मीदों के प्लेटफार्म के ‘आउटर’ पर ही खड़ी रह गई। हाईटेक बजट में घोषणाएं तो तमाम हुईं पर पूर्वांचल में रेल सुविधाओं के छींटे ही गिरे। कुछ साप्ताहिक ट्रेनों को छोड़ दिया जाए तो पूर्वांचल के जिलों को राजधानी, शताब्दी या दूरंतो सरीखी रेलगाड़ियां में सफर की सौगात नहीं मिल सकी।
हालांकि मुगलसराय स्टेशन से अहमदाबाद-पटना तथा कामाख्या-कटरा एक्सप्रेस दो साप्ताहिक ट्रेनें होंगी। साथ ही कामाख्या से बंगलूरू के लिए प्रीमियम एसी ट्रेन का स्टॉपेज भी यहां होगा। वाराणसी से नई दिल्ली, छपरा-लखनऊ व गोरखपुर-आनंद विहार के लिए सप्ताह में एक दिन ट्रेन चलाने की घोषणा हुई। छपरा-लखनऊ एक्सप्रेस ट्रेन बाया बलिया चलेगी। गोरखपुर से आनंद विहार तथा लखनऊ से छपरा तक चलाई गई नई ट्रेन का लाभ भी पूर्वांचल को मिलेगा। गाजीपुर- ताड़ीघाट रेलवे स्टेशन को जोड़ने की भी उम्मीद है। सोनभद्र जिले को न कोई ट्रेन मिली, न ही यात्री सुविधा।
रेल बजट पेश होने के बाद मऊ-गाजीपुर नए रेलवे रूट का सर्वे होने की उम्मीद जगी है। इसके साथ ही आजमगढ़ से मुंबई के लिए साप्ताहिक ट्रेन चलाने की भी घोषणा हुई है जिसकी मांग काफी दिनों से होती रही है। बजट में भदोही जनपद को कुछ नहीं मिला। जौनपुर के लोगों को भी निराशा हुई है। लोकल यात्रियों के लिए बक्सर-मुगलसराय पैसेंजर ट्रेन को वाराणसी तक बढ़ा दिया है। इन तमाम घोषणाओं के बाद भी पूर्वांचल के लिहाज से यह बजट बहुत अच्छा नहीं कहा जा रहा है।
रेल बजट में पूर्वांचलवासी ‘कुछ खास’ की उम्मीद इसलिए भी कर रहे थे क्योंकि रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा भी पीएम संसदीय क्षेत्र के पड़ोस के गाजीपुर से सांसद हैं। वहीं देवरिया से सांसद कलराज मिश्रा भी मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। चंदौली गृहमंत्री और राजनाथ सिंह का गृह जनपद है। पूरे पूर्वांचल में सिवाय आजमगढ़ के सभी सांसद भाजपा के हैं।
वाराणसी में 'मोदी एक्सप्रेस' की रफ्तार धीमी
उधर मंडुवाडीह से छपरा के लिए घोषित नई ट्रेन का फायदा औड़िहार, मऊ और बलिया के यात्रियों को भी मिलेगा। इसके साथ ही यात्री सुविधाओं के संबंध में की गई घोषणाओं से भी लोगों के चेहरे खिले हैं। ए और ए-1 क्लास के स्टेशनों की सफाई की जिम्मेदारी बड़ी संस्थाओं को सौंपी जाएगी। इसका सीधा लाभ कैंट सहित शहर के अन्य स्टेशनों को मिलेगा।
वाराणसी रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत सफाई को लेकर रहती है। इस व्यवस्था के बाद इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पेय जल, महिला सुरक्षा, यात्री सुविधा से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो सकेंगी। जिन रेलवे स्टेशनों को विकसित किया जाना है उनके नाम की घोषणा भले ही न हुई हो पर रेल से जुड़े सूत्रों की मानें तो उनमें वाराणसी का नाम भी शामिल है।
अहमदाबाद से वाराणसी होते हुए पटना के लिए घोषित नई ट्रेन काशी व गुजरात के बीच व्यावसायिक रिश्तों को भी मजबूत करेगी। बुनकरी व साड़ी कारोबार के दृष्टिकोण से दोनों क्षेत्रों में गहरा रिश्ता है। बुनकर व कारोबारी अक्सर इस रूट पर यात्रा करते रहते हैं। ऐसे में इस ट्रेन की जरूरत वर्षों से महसूस की जा रही थी। अब यह भी पूरी हो गई। इसके अलावा काशी में निवास करने वाले गुजराती समाज के हजारों लोग भी गुजरात का सफर आराम से तय कर सकेंगे। एक प्रधानमंत्री की कर्मभूमि तो दूसरी जन्मभूमि होने की वजह से भी यह ट्रेन महत्वपूर्ण हो जाती है।
ट्रेन जोड़ेगी नए व्यावसायिक रिश्ते
उधर मंडुवाडीह से छपरा के लिए घोषित नई ट्रेन का फायदा औड़िहार, मऊ और बलिया के यात्रियों को भी मिलेगा। इसके साथ ही यात्री सुविधाओं के संबंध में की गई घोषणाओं से भी लोगों के चेहरे खिले हैं। ए और ए-1 क्लास के स्टेशनों की सफाई की जिम्मेदारी बड़ी संस्थाओं को सौंपी जाएगी। इसका सीधा लाभ कैंट सहित शहर के अन्य स्टेशनों को मिलेगा।
वाराणसी रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत सफाई को लेकर रहती है। इस व्यवस्था के बाद इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पेय जल, महिला सुरक्षा, यात्री सुविधा से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो सकेंगी। जिन रेलवे स्टेशनों को विकसित किया जाना है उनके नाम की घोषणा भले ही न हुई हो पर रेल से जुड़े सूत्रों की मानें तो उनमें वाराणसी का नाम भी शामिल है।
अहमदाबाद से वाराणसी होते हुए पटना के लिए घोषित नई ट्रेन काशी व गुजरात के बीच व्यावसायिक रिश्तों को भी मजबूत करेगी। बुनकरी व साड़ी कारोबार के दृष्टिकोण से दोनों क्षेत्रों में गहरा रिश्ता है। बुनकर व कारोबारी अक्सर इस रूट पर यात्रा करते रहते हैं। ऐसे में इस ट्रेन की जरूरत वर्षों से महसूस की जा रही थी। अब यह भी पूरी हो गई। इसके अलावा काशी में निवास करने वाले गुजराती समाज के हजारों लोग भी गुजरात का सफर आराम से तय कर सकेंगे। एक प्रधानमंत्री की कर्मभूमि तो दूसरी जन्मभूमि होने की वजह से भी यह ट्रेन महत्वपूर्ण हो जाती है।
वाराणसी के लिए खास
- वाराणसी से नई दिल्ली के लिए एक्सप्रेस (दैनिक)
- वाया वाराणसी पटना-अहमदाबाद एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
- मंडुवाडीह-छपरा डेमू (सप्ताह में 6 दिन)
- छपरा-लखनऊ एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) वाया बलिया, गाजीपुर, वाराणसी
- रामेश्वरम से काशी सहित आध्यात्मिक स्थलों के लिए विशेष पैकेज ट्रेनें
- बड़े रेलवे स्टेशनों की सफाई व्यवस्था पीपीपी मॉडल पर, सीसीटीवी कैमरों से रखी जाएगी नजर
- स्टेशनों को वाई-फाई से लैस करना
- प्लेटफार्म व अनारक्षित टिकट की भी ऑनलाइन उपलब्धता
- बुद्ध सर्किट (सारनाथ) व काशी में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष ट्रेन का पैकेज
- सफाई व्यवस्था दुरुस्त किए जाने वाले 50 स्टेशनों में वाराणसी का भी नाम शामिल होना
आस जो नहीं हो सकी पूरी
- दिल्ली-पटना वाया वाराणसी बुलेट ट्रेन/हाई स्पीड ट्रेन
- दक्षिण भारत के लिए ट्रेन
- वाराणसी से लखनऊ शताब्दी ट्रेन
- वाराणसी से बड़े महानगरों के लिए सीधी ट्रेनें
- मंडुवाडीह-इलाहाबाद रेल लाइन दोहरीकरण व विद्युतिकरण