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अखिलेश सरकार के बचाव में उतरीं डिंपल

Tue, 12 Aug 2014 03:52 PM IST
Updated Tue, 12 Aug 2014 03:52 PM IST
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exclusive interview of akhilesh wife dimple yadav

कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक दंगों को लेकर लंबे अर्से से सवालों के घेरे में खड़ी की जा रही उत्तरप्रदेश की सपा सरकार को चौबीस घंटे के प्रोपगेंडा वार का शिकार बनाया जा रहा है। यह कहना है सपा की कन्नौज से लोकसभा सांसद डिंपल यादव का।

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल का यह भी मानना है कि एक युवा सीएम को राजनीतिक तौर पर कामयाब होने से रोकने की कोशिश के तहत कानून व्यवस्था को तूल दिया जा रहा। जबकि औसतन दिल्ली और मध्यप्रदेश में यूपी के मुकाबले महिलाओं के खिलाफ हिंसा के ज्यादा मामले सामने आते हैं।
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उनका मानना है कि दुष्कर्म जैसे घिनौने अपराध को रोकने के लिए कानून व्यवस्था के साथ-साथ समाज की मनोवृति बदलने की भी सख्त जरूरत है। अमर उजाला से खास बातचीत में डिंपल यादव ने विकास के मुद्दे पर अखिलेश सरकार का न केवल बचाव किया बल्कि पीठ भी थपथपाई। पेश हैं इस बातचीत के मुख्य अंश।

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'हमारे अच्छे कामों को अनदेखा किया जा रहा है'

exclusive interview of akhilesh wife dimple yadav

:- उत्तरप्रदेश की सपा सरकार अपने कार्यकाल के तीसरे साल में है पर लंबे अर्से से शासन के मानकों पर खरा नहीं उतरने के बने मानस को वह बदल क्यों नहीं पा रही?

:-अगर आप शासन के मानकों की बात करते हैं तो फिर यूपी की सपा सरकार कई क्षेत्रों में देश में सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रही है। हाईवे और जिले की सड़कों को बनाने के मामले में हम महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों से काफी बेहतर काम कर रहे हैं।

केंद्र की नई सरकार गांवों में शहरी सुविधा की अभी जो बात कर रही है, यूपी सरकार पहले से ही इस पर काम कर रही है। मगर दिक्कत यह है कि चौबीस घंटे के प्रोपगेंडा वार में हमारे अच्छे कामों को नहीं आंका जा रहा।

कठघरे में केवल यूपी सरकार ही क्यों?

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:- दंगों से लेकर दुष्कर्म जैसे कानून व्यवस्था के तमाम मामलों को देखते हुए प्रदेश सरकार के बैक फुट रहने की बात को आप कैसे नकारेंगी?

:- कानून व्यवस्था की बात उठती है तो हमारा सवाल है किस राज्य में आदर्श स्थिति है। मैं यह सवाल उठाकर किसी घटना को न्याय संगत नहीं ठहरा रही, पर यह जरूर पूछंगी कि क्या दिल्ली और मध्यप्रदेश में दुष्कर्म की घिनौनी घटनाएं नहीं होती? लेकिन कठघरे में केवल यूपी को ही क्यों खड़ा किया जाता है।

हमें इस बात की अनदेखी नहीं करनी चाहिए कि इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए कानून व्यवस्था ही नहीं समाज की मनोवृति को बदलने पर भी गंभीर होना होगा। जहां तक महिलाओं के खिलाफ अपराध का मसला है तो इसमें यूपी सरकार बेहद सख्त रुख अपना रही है। रही बात सांप्रदायिक दंगों की तो सपा की सेक्यूलरिज्म के प्रति निष्ठा और कुर्बानी के लिए हमें किसी से प्रमाणपत्र नहीं चाहिए। दंगा भड़काने के पीछे कौन लोग हैं यह देश की जनता को भी मालूम है।

'सरकार के खिलाफ हो रही है राजनीतिक साजिश'

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:- सपा सरकार को बदनाम करने की साजिश का आपके पास आधार क्या है?

मुख्यमंत्री विकास के मुद्दों को तवज्जो दे रहे हैं और आम लोगों के हित में काम कर रहे हैं। जाहिर तौर पर राजनीतिक विरोधी इसकी वजह से उन्हें निशाना बना रहे ताकि लोगों का ध्यान सरकार के विकास कार्यों से बंटा रहे। महंगाई को लेकर हम आम लोगों की पीड़ा से वाकिफ हैं और इसमें सबसे ज्यादा मार गरीबों पर पड़ रही। सपा इस महंगाई के खिलाफ शुरू से उग्र आवाज उठा रही है। इससे लोगों का ध्यान बंटे इसलिए कानून व्यवस्था को ज्यादा उछाला जा रहा।

:- बिजली की कमी यूपी में बड़ी चुनौती है, इस मामले में आपकी सरकार अब तक जूझती क्यों दिख रही है?

बिजली का मौजूदा संकट वास्तव में प्रदेश की पिछली सरकार की देन है जिसने बिजली उत्पादन की दिशा में एक कदम बढ़ाना तो दूर पिछली सपा सरकार के प्लांट लगाने के लिए किए गए कुछ अहम फैसलों को पलट दिया।

हमारी सरकार के आते ही यूपी पहला राज्य है जिसने कोयला आयात लिंकेज मांगा। बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ ही लोगों को वर्तमान में ज्यादा दिक्कत न हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। यह इस बात से भी जाहिर है कि हमारी सरकार ने बिजली खरीदने पर सबसे ज्यादा खर्च किए हैं।

अन्याय का शिकार हो रहे हैं हम: डिंपल

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:- आपने कहा मुख्यमंत्री यूपी के विकास और चुनावी वादों को पूरा करने में फोकस कर रहे हैं पर इसकी तस्वीर सामने क्यों नहीं आ रही?

:- मैंने कहा न कि हम अन्याय का भी शिकार हो रहे हैं। गांवों से लेकर शहरों में किए जा रहे हमारे विकास कार्यों को दूसरे मुद्दे उछाल कर ढंकने की कोशिश हो रही है। आगरा से लखनऊ तक एक्सप्रेस हाईवे बनाने का फैसला हो या यूपी के हर जिले की सड़कों को फोर लेन बनाने का काम, इससे विकास का चेहरा कैसे बदलेगा इसकी कोई बात नहीं सामने लायी जाती।

सड़कें विकास की सबसे बुनियादी जरूरत है और यूपी कई राज्यों के मुकाबले बेहतर काम कर रहा है। लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में मेट्रो ट्रेन की परियोजना पर आगे बढ़ना हो या किसानों को ऊपज का सही मूल्य दिलाने की पहल। हर क्षेत्र में काम हो रहा है। लखनऊ में हम 15 अक्टूबर से आईटी सिटी का निर्माण करने जा रहे हैं। इन पहलों का ही नतीजा है कि केन्द्र सरकार के सर्वे में यूपी युवाओं के लिए रोजगार सृजन करने के मामले में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से बेहतर पाया गया है।

:- लेकिन लोकसभा चुनाव में इसके बावजूद समाजवादी पार्टी को भारी शिकस्त मिली है इस पर आप क्या कहेंगी?

:- चुनाव में बेशक हम उम्मीद के अनुरुप प्रदर्शन नहीं कर पाए। निसंदेह नतीजों पर हम गौर कर रहे हैं और जहां चूक हुई है उससे दुरुस्त किया जा रहा है। इस बात में कोई दो राय नहीं हो सकती कि समाजवादी पार्टी में कार्यकर्ता सबसे बड़ी ताकत हैं। हमें विघटनकारी राजनीति की गंभीर चुनौतियों को देखते हुए फ्रंटफुट पर आकर अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की जरूरत है।

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