दो बड़ी परीक्षाएं साथ, 14 हजार हुए वंचित
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शहर में रविवार को परीक्षार्थियों का जमावड़ा रहा। एनडीए और यूपी-एसईई की परीक्षा में यहां तकरीबन 35 हजार छात्र-छात्राएं शामिल हुए लेकिन दो बड़ी परीक्षाएं एक साथ होने के कारण 14 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को किसी एक परीक्षा से वंचित होना पड़ा। एनडीए के तो साढ़े बारह हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी।
संघ लोक सेवा आयोग की एनडीए तथा सूबे के सरकारी तथा निजी इंजीनियरिंग कालेजों में दाखिले के लिए उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी की इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (एसईई) में बारहवीं के विद्यार्थी शामिल होते हैं।
दो परीक्षा हुईं एक दिन
ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने दोनों परीक्षाओं के लिए आवेदन किया था लेकिन ऐसे अभ्यर्थियों को किसी एक मौके से वंचित होना पड़ा। एनडीए की परीक्षा छोड़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक रही।
इलाहाबाद में कुल 30579 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 17699 ही परीक्षा में शामिल हुए। एसईई के बीटेक पाठ्यक्रम के लिए 18 हजार विद्यार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 92 फीसदी परीक्षा में शामिल हुए।
रसायन तय करेगी बीटेक की मेरिट
बीटेक पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए यूपी-एसईई की परीक्षा में रसायन विज्ञान की महत्ता बढ़ गई है। रसायन विज्ञान के सवाल अपेक्षाकृत कठिन थे।
ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह विषय ही मेरिट तय करेगा। गलत उत्तर देने वालों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा। समान अंक की स्थिति में जिन्होंने ज्यादा सवाल गलत किए हैं उन्हें मेरिट में नीचे रखा जाएगा।
परीक्षा देकर बाहर निकले छात्र-छात्राओं का कहना था कि पैटर्न पिछले साल जैसा ही रहा लेकिन कुछ सवाल कठिन थे। श्याम देव, अनीता का कहना था कि केमेस्ट्री के ज्यादातर सवाल लंबे समीकरण पर आधारित थे, जो याद हैं तो ठीक नहीं तो गलत।
10 सवाल हल करने में लगा काफी वक्त
उन्होंने बताया कि गणित में भी 10 सवाल को हल करने में काफी वक्त लगा। इसकी वजह से कई सवाल छूट गए। एनडीए के अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन के पेपर ने खूब छकाया।
जीतू और आशीष ने बताया कि 15 से अधिक ऐसे सवाल थे जिनके बारे में उन्होंने कहीं सुना भी नहीं था। उनका कहना था कि भौतिकी के भी कई सवाल ऐसे ही थे, जबकि दोनों विद्यार्थी विज्ञान वर्ग के हैं।