2006 में इस्तीफा देना चाहते थे पूर्व राष्ट्रपति कलाम
दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सन् 2006 में इस्तीफा देने को सोच लिया था। दरअसल, उस समय उनके पास बिहार विधानसभा को भंग करने का प्रस्ताव आया था, जिस पर उन्हें न चाहते हुए भी हस्ताक्षर करने पड़े थे, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति के आदेश को खारिज कर दिया था।
अंग्रेजी अखबार The Times Of India के अनुसार ये बातें कलाम के पूर्व प्रेस सचिव एसएम खान ने 'महानतम इंसान के साथ मेरे दिन' विषयक गोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि विधानसभा भंग करने वाला आदेश जब सर्वोच्च न्यायालय से खारजि हो गया, तब पूर्व राष्ट्रपति को यह लगा था कि उन्हें उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए था।
इस दौरान उन्होंने बताया कि बिहार के तत्कालीन राज्यपाल बूटा सिंह ने विधानसभा को भंग करने की सिफारिश की थी। उनकी इस सिफारिश को कैबिनेट ने मंजूर किया और आखिरी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया था। जिस दौरान यह प्रस्ताव आया था, उस समय पूर्व राष्ट्रपति रूस की यात्रा पर थे।
और जब बुश हुए कायल
खान के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति ने इस मामले के संबंध में अपने बड़े भाई से
रामेश्वरम मे बात की थी। लेकिन उनके भाई, पूर्व राष्ट्रपति के किसी भी ऐसे
कदम के खिलाफ थे। अगर कलाम उस वक्त इस्तीफा देते तो संवैधानिक संकट की
स्थिति पैदा हो जाती। अंत में कलाम ने भी यही फैसला किया कि वे इस तरह का
कोई कदम नहीं उठाएंगे।
खान के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने पूर्व
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके कैबिनेट को अपने विजन 2020 पावर
प्वाइंट प्रजेंटेशन (पीपीटी) के साथ बताया था। खान ने अनुसार पूर्व
राष्ट्रपति पीपीटी के प्रजेंटशन में खासी दिलचस्पी थी। यहीं नहीं जब वे
विदेशी नेताओं से मुलाकात करते थे तो भी इसी बात पर जोर देते थे की पीपीटी
प्रजेंटेशन का प्रयोग हो।
पीपीटी प्रजेंटेशन से ही जुड़े एक वाकये की चर्चा
करते हुए खान ने कहा कि 2006 में ही अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश
मिलने आए थे, तो कलाम में उन्हें एक पीपीटी प्रजेंटेशन पर बैठा लिया। जब
पूरी पीपीटी की प्रजेंटेशन देख ली गई तब बुश ने कहा कि सर इसे समझने के लिए
वैज्ञानिक होना पड़ेगा, लेकिन हम इस पर काम जरुर करेंगे।