बीमा बिल: मनमोहन-सोनिया में मतभेद
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पार्टी नेताओं के एक बड़े वर्ग के उलट पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बीमा बिल पर सरकार का समर्थन करने के पक्ष में हैं।
कांग्रेस के कई नेता इस बिल को इस सत्र में टालने की वकालत कर रहे हैं ताकि मोदी सरकार को झटका दिया जाए और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से पहले उनको यह तोहफा न मिल सके। मगर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से बिल को इसी सत्र पारित कराने की सलाह दी है।
सूत्रों की मानें तो पूर्व प्रधानमंत्री ने पार्टी अध्यक्ष को कहा है कि बिल को टालने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की छवि धूमिल होगी। माकपा, तृणमूल कांग्रेस, जदयू और सपा बीमा बिल को इस सत्र में टालने के लिए कांग्रेस पर विपक्षी एकता की दुहाई देकर दबाव बना रही हैं।
बिल को लेकर सोनिया की जुदा राय
आर्थिक सुधारों को रफ्तार देने और ओबामा की यात्रा से पहले बीमा विधेयक को पारित कराने का सरकार पर भारी दबाव है। दूसरी तरफ कांग्रेस सूत्रों की मानें तो पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष को बीमा विधेयक को इस सत्र में पास नहीं कराने की बात कही थी।
पार्टी के कुछ नेताओं का तर्क था कि कांग्रेस संसद में विपक्षी दलों की मुखिया के तौर पर काम कर ही है। साध्वी निरंजन ज्योति के विवादित बोल पर मचे बवाल को लेकर कांग्रेस ने ही सरकार को घेरने में विपक्षी पार्टियों का नेतृत्व किया था।
इन पार्टी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस को बीमा बिल के खुलकर समर्थन में आने की अभी जरूरत नहीं है। इसलिए बिल को फिलहाल टाल दिया जाए। मगर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया को बिल को टालने के बजाय पास कराने की सलाह दी है।