अनोखी कहानी, प्यार में धोखा खाकर बना आईएस आतंकी
पिछले साल आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल होने इराक गया मुंबई का युवक आरिब मजीद इन दिनों महात्मा गांधी पर लिखी किताबें पढ़ रहा है। माजिद नवंबर में भारत लौटा था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर मुंबई के ऑर्थर रोड जेल में रखा गया है।
गिरफ्तारी के बाद उसने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) को बताया कि वह इराकी सेना के खिलाफ आईएस का साथ देने इराक गया था। हालांकि अब उसमें तब्दीलियां दिखाई दे रही हैं। चार महीने से जेल में बंद माजिद धर्म और अपराधियों के सुधार पर लिखी किताबें पढ़ रहा है।
एनआईए के अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी के चंद दिनों बाद ही मजीद को अपने किए पर पछातावा होने लगा था। अब उसमें सुधार के आसार दिखाई देने लगे हैं। एनआईए मजीद के मामले में इस महीने के अंत तक आरोप पत्र दाखिल कर सकती है।
मजीद के खिलाफ 200 पन्ने की जांच रिपोर्ट
एनआईए से पूछताछ में मजीद ने बताया कि वह अपने तीन दोस्तों-फहाद शेख, शाहिम टांकी, और अमन टांडेल के साथ आईएस में शामिल होने इराक गया था। हालांकि पिछले साल 29 नवंबर को वह भारत लौट आया। मजीद के बयानों से आधार पर पुलिस ने 200 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार की है।
एनआईए को दिए बयान में इंजिनीयरिंग के छात्र रह चुके मजीद ने कहा कि उसे इंटरनेट के जरिए आतंकियों ने बरगलाया। उसे सर्फिंग का शौक था। इंटरनेट पर इराक और पड़ोसी मुल्कों में मुस्लिमों पर होने वाले अत्याचारों के वीडियो देखा करता।
एनआईए को उसने बताया, 'मुझे इराक और पड़ोसी मुल्कों में मुस्लिमों पर होने वाले अत्याचारों का वीडियो देखने का शौक था।' मजीद ने बताया कि इंटरनेट पर ही वह एक महिला के सपंर्क में आया। उसका नाम ताहिरा भट्ट था। वे दोनों रोजाना ही चैट करते और मजीद को उससे प्यार हो गया।
ताहिरा के प्रेम जाल में फंस गया मजीद
ताहिरा से प्यार होने के बाद मजीद ने इराक जाने का फैसला किया। उसने बताया कि वह और उसके तीन दोस्तों ने इराक जाकर जिहाद में शामिल होना चाहते थे। ताहिरा ने इस काम में मजीद की मदद की। मजीद और उसके दोस्त भारत से इराक गए। वहां तहिरा ने अपने एक सहयोगी अली को उनसे मिलने के लिए भेजा। अली से उनकी मुलाकात मोसुल में हुई, जो उन्हे रक्का सिटी ले गया।
मजीद ने बताया कि वहां उसे एके-47, स्नाइपर राइफल्स, पीकेसी गन मशीन, ग्लॉक पिस्टल जैसे हथियार चलाना सिखाया गया। हालांकि रक्का पहुंचने के बाद मजीद की मुलाकात रक्क से नहीं हो सकी। उसे ये बात बहुत ही खराब लगी।
मजीद ने बताया कि उसने सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपना स्टेटस बदल कर मैरिड कर लिया। फिर भी वह उससे मिलना चाहता था, लेकिन उसने मना कर दिया। मजीद को उस समय लगा कि उसे फंसाया गया है। वह एक प्रेम जाल था।
गांधी पर लिखी किताबें पढ़ रहा है मजीद
हालांकि मजीद ने उसके बाद फैसला किया कि, वह जिहाद पर ही ध्यान देगा। उसने सीरियाई सेनाओं पर दो बार हमला किया, दोनों ही हमलों मे उसे गोली लगी। ऐसी खबरें भी आईं कि मजीद आइएस के लिए लड़ते हुए मारा गया।
मजीद ने बताया कि हमलों में घायल होने के बाद उसे शेल्टर में रखा गया, जहां उसने आइएस के लड़ाकों को महिलाओं का यौन शोषण करते देखा। उस वाकए के बाद ही आईएस से उसका मोहभंग हो गया।
उसने बताया कि उसकी कल्पना से परे था महिलाओं के साथ आईएस लड़ाकों को ऐसा व्यवहार। मजीद ने उसके बाद अपने परिवार को फोन किया, और घर लौटने का फैसला किया। मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में बंद मजीद इन दिनों महात्मा गांधी, धर्म और कैदियों के सुधार पर लिखी किताबें पढ़ रहा है।