मनमोहन को लेकर एक और किताब में सनसनीखेज खुलासे!
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब से उठा विवाद थमा नही था, अब उन्हें कठघरे में खड़ा करने के लिए एक और किताब आ रही है।
ये किताब कांग्रेस के पुराने दिग्गज नेता और यूपीए-1 में विदेश मंत्री रह चुके के नटवर सिंह ने लिखी है।
नटवर सिंह को किसी जमाने में सोनिया गांधी के विश्वासपात्र नेताओं में गिना जाता था। राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की राजनीति में सोनिया को लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि 2005 में 'खाद्य के बदले तेल घोटाले' में उन्हें विदेश मंत्री पद से हटा दिया गया था।
नटवर ने प्रधानमंत्री पर लगाए हैं कई आरोप
कांग्रेस आलाकमान की नजदीकियों के कारण नटवर की जीवनी चर्चा में आ गई है।
किताब के प्रकाशन के पूर्व एक अंग्रेजी अखबार को दिए साक्षात्कार में नटवर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कई आरोप लगाए हैं। नटवर सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दो चीजों का कुछ ज्यादा ही श्रेय दिया जाता है।
पहला है देश में आर्थिक सुधार, जिसके वास्तविक निर्माता थे पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव और दूसरा है अमेरिका के साथ भारत का परमाणु समझौता।
बारू की किताब को लेकर उठ रहे सवाल
माना जा रहा है कि नटवर की जीवनी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस की भीतरी कामकाज के बारे में कई खुलासे कर सकती है। हालांकि नटवर ने कहा है कि उनकी किताब लोकसभा चुनाव के बाद ही प्रकाशित होगी।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब 'द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर-द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंह' के प्रकाशन के समय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
किताब में संजय ने यूपीए सरकार के कामकाज के बारे में खुलासे किए हैं।
नटवर सिंह का बेटा है भाजपा विधायक
नटवर सिंह इंदिरा गांधी के जमाने से ही नेहरू-गांधी परिवार के करीबी नेताओं में शामिल रहे हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आईएफएस अधिकारी के रूप में की थी। 1984 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और राजीव गांधी की सरकार में मंत्री बने।
राजीव की मृत्यु के बाद वे सोनिया गांधी के सलहाकार बने और कांग्रेस वर्किंग कमेटी में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। 2005 में उन पर 'भोजन के बदले तेल' घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा था।
नटवर का कहना है कि कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन वे किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुए। हालांकि उनका बेटा भाजपा विधायक है।
किताब से मच सकती है कांग्रेस में खलबली
माना जा रहा है कि नटवर की जीवनी में उन घटनाओं, साजिशों और लोगों के बारे में भी खुलासा हो सकता है, जिनके जरिए उन्हें कांग्रेस से बाहर निकाला गया।
नटवर का कहना है कि उन्होंने अपनी किताब में निजी और राजनीतिक घटनाओं के बारे में ईमानदारी से और बिलकुल निष्पक्ष होकर लिखा है।
किताब में आईएफएस अधिकारी के रूप में उनके 31 सालों और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में 21 सालों का ब्योरा है। ये किताब पूरी होने के कगार पर है। नटवर इससे पहले विभिन्न विषयों पर 9 किताबें लिख चुके हैं।
आर्थिक सुधारों के लिए तैयार न थे मनमोहन
1991 में जब भारतीय अर्थव्यवस्था कंगाली के कगार पर थी, देश के दरवाजे विदेशी निवेश के लिए खोल दिए गया। उन आर्थिक सुधारों का श्रेय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दिया जाता है। मनमोहन उन दिनों वित्तमंत्री थे, जबकि पीवी नरसिंह राव प्रधानमंत्री।
लेकिन नटवर सिंह का कहना है मनमोहन सिंह उन दिनों आर्थिक सुधारों के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने बताया, 'प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने मनमोहन को वित्तमंत्री नियुक्त किया, लेकिन शुरूआती दौर में आर्थिक सुधारों के लिए तैयार न थे।'
मनमोहन ने उन्हीं दिनों नेहरुवादी समाजवाद को आधार बना एक रिपोर्ट तैयार की थी, ऐसे में उन्हें सुधारों की बात करना मुश्किल लगा रहा था। यही बात उन्होंने राव से कही। लेकिन राव के दबाव के कारण उन्हें आर्थिक सुधारों की नीति अपनानी पड़ी।