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पूर्व मुख्य न्यायाधीश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 26 Aug 2013 08:29 PM IST
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जस्टिस केजी बालाकृष्णन को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।
सर्वोच्च अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस बालकृष्णन पर कथित कदाचार एवं बेनामी संपत्ति की खरीद का आरोप है।
जस्टिस बलबीर सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह तीन सप्ताह के अंदर जवाब दायर करे और कानून एवं न्याय मंत्रालय अदालत को इस मुद्दे पर पहले दायर की गई शिकायत की स्थिति से अवगत कराए।
पीठ ने कहा कि हम यह जानना चाहते हैं कि सरकार ने पूर्व में प्राप्त शिकायत का निपटारा कर दिया या यह अभी भी लंबित है। गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ की ओर से जनहित याचिका दायर करने वाले वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र सरकार को लगभग ढाई साल पहले इस संबंध में शिकायत भेजी गई थी। शिकायत के समर्थन में सभी दस्तावेज भी संलग्न किए गए थे।
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याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि जांच शुरू करने के लिए सरकार को शीर्ष अदालत को रेफरेंस भेजना जरूरी है। इसलिए एनएचआरसी के अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट को रेफरेंस भेजा जाए।
याचिका में कहा गया है कि मुख्य आरोप उनकी बेटियों, दामाद और भाई के नाम से बेनामी संपत्ति खरीदने से संबंधित है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐसे सबूत हैं जो संकेत देते हैं कि जस्टिस बालकृष्णन गंभीर कदाचार के दोषी रहे हैं। उसके बावजूद सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की प्रक्रि या शुरू करने से इंकार कर दिया।
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सर्वोच्च अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस बालकृष्णन पर कथित कदाचार एवं बेनामी संपत्ति की खरीद का आरोप है।
जस्टिस बलबीर सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह तीन सप्ताह के अंदर जवाब दायर करे और कानून एवं न्याय मंत्रालय अदालत को इस मुद्दे पर पहले दायर की गई शिकायत की स्थिति से अवगत कराए।
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पीठ ने कहा कि हम यह जानना चाहते हैं कि सरकार ने पूर्व में प्राप्त शिकायत का निपटारा कर दिया या यह अभी भी लंबित है। गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ की ओर से जनहित याचिका दायर करने वाले वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र सरकार को लगभग ढाई साल पहले इस संबंध में शिकायत भेजी गई थी। शिकायत के समर्थन में सभी दस्तावेज भी संलग्न किए गए थे।
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याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि जांच शुरू करने के लिए सरकार को शीर्ष अदालत को रेफरेंस भेजना जरूरी है। इसलिए एनएचआरसी के अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट को रेफरेंस भेजा जाए।
याचिका में कहा गया है कि मुख्य आरोप उनकी बेटियों, दामाद और भाई के नाम से बेनामी संपत्ति खरीदने से संबंधित है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐसे सबूत हैं जो संकेत देते हैं कि जस्टिस बालकृष्णन गंभीर कदाचार के दोषी रहे हैं। उसके बावजूद सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की प्रक्रि या शुरू करने से इंकार कर दिया।