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बाहुबली हो या प्रभावशाली, अदालत की चौखट पर समान

Thu, 01 Nov 2012 11:45 PM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Thu, 01 Nov 2012 11:45 PM IST
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everyone is similar at the doorstep of court

कोई बाहुबली हो या फिर प्रभावशाली, अदालत की चौखट पर सभी समान हैं। देश के हर नागरिक का यह अधिकार है कि वह बिना किसी डर के न्यायिक प्रक्रिया में शामिल हो। भले ही मुकदमा किसी दूसरे राज्य में ही क्यों न चल रहा हो। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दहेज उत्पीड़न मामले में अभियुक्त के परिजनों को बुरी तरह पीटे जाने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए की। सर्वोच्च अदालत ने राज्य पुलिस को हिदायत देते हुए तत्काल अभियुक्तों को समुचित सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

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जस्टिस केएस राधाकृष्णन व जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने अदालत में पिटाई के मसले पर धनबाद के न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से कोई कदम न उठाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट का इस मामले में कोई सख्त कदम न उठाना निंदनीय है। उत्तराखंड, देहरादून के रहने वाले परिवार के खिलाफ झारखंड में मुकदमा चल रहा है तो उनकी सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी अदालत की है। यदि उन्हें किसी डर में रहते हुए न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़े तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
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याचिकाकर्ता आदित्य तोमर की ओर से पेश अधिवक्ता डीके गर्ग ने पीठ से उनके मुवक्किलों के खिलाफ धनबाद में चल रहे मामले को उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित किसी अन्यत्र राज्य में स्थानांतरित करने की गुजारिश की। पीठ ने हालांकि इस आग्रह को ठुकराते हुए कहा कि यह पांच साल पुराना मामला है। अब इसे अन्यत्र स्थानांतरित किया जाना उचित नहीं है। लेकिन पुलिस सभी अभियुक्तों को समुचित सुरक्षा प्रदान करेगी, ताकि वह न्यायिक प्रक्रिया का सामना बिना किसी डर के करें।
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गौरतलब है कि तोमर का विवाह मई, 2007 में झारखंड की रहने वाली कनक से हुआ था। वह शादी के कुछ माह बाद मायके चली गई और अगस्त, 2008 में उसने धनबाद में पहले तलाक का मुकदमा किया। इसके बाद पति व उसके घर के सात सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। ससुराल पक्ष के लोगों को इसी वर्ष अदालत में बुरी तरह पीटा गया था, लेकिन मजिस्ट्रेट और पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया।

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