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'पूर्व सैनिकों की पेंशन में हर साल नहीं कर सकते बदलाव'

Mon, 31 Aug 2015 10:16 PM IST
Updated Mon, 31 Aug 2015 10:16 PM IST
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every year we can't change pension structure of former army personnel

सरकार ने वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के तहत पेंशन में हर साल बदलाव की पूर्व सैनिकों की मांग को एक तरह से खारिज कर दिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि पेंशन में हर साल बदलाव नहीं किया जा सकता, लेकिन साथ ही कहा कि सरकार उच्च पेंशन दरों के साथ कम उम्र में रिटायर होने वाले सैनिकों के हितों की रक्षा करेगी।

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जेटली ने कहा कि दुनिया में कहीं भी पेंशन में हर साल बदलाव नहीं होता है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ओआरओपी के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ‘केवल एक’ मुश्किल है, उसका ‘गणितीय जमा घाटा।’ उन्होंने कहा, ओआरओपी के लिए मेरा अपना फार्मूला है।
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किसी और का ओआरओपी पर अपना फार्मूला हो सकता है, लेकिन यह तार्किक मापदंडों पर होना चाहिए। आप ऐसा ओआरओपी नहीं लागू कर सकते, जहां पेंशन हर महीने या हर साल संशोधित होती हो।’ वित्त मंत्री ने साथ ही कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें जल्द ही आएंगी।
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जेटली ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ‘मैं पैसे को लेकर बेहद सतर्क रहता हूं और इसलिए मेरा काम एक गृहिणी के जैसा है, जिसे घर में खर्च होने वाले एक-एक पैसे का हिसाब-किताब रखना पड़ता है, ताकि पहले जरूरत से अधिक खर्च न कर दें और फिर उधार मांगें। यदि आप एक सीमा से अधिक उधार मांगते हैं, तो आप वित्तीय अनुशासनहीनता में शामिल होते हैं।’

'भूमि अध्यादेश को खत्म होने देना सरकार के लिए झटका नहीं'

every year we can't change pension structure of former army personnel

पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन की अपनी मांग को लेकर पिछले 78 दिन से जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं। उनकी मांगों में पेंशन में सालाना संशोधन करना भी शामिल है।

जेटली ने कहा, ‘हमने सैद्धांतिक तौर पर ओरआरओपी की मांग को स्वीकार कर लिया है। हम सैद्धांतिक तौर पर इसे लागू करेंगे लेकिन हमें कोई ऐसा नजीर पेश नहीं करना चाहिए जिससे समाज के दूसरे वर्गों से भी ऐसी ही आवाजें उठने लगें।’

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि भूमि बिल अध्यादेश को खत्म होने देने का फैसला सरकार के लिए झटका नहीं है। राज्यों को इस मुद्दे से निपटने के लिए ज्यादा लचीलापन प्रदान करने की खातिर सरकार ने वैकल्पिक रास्ता अपनाया है। जेटली ने कहा, ‘मैं इसे झटका नहीं कहूंगा। यह आगे के लिए तय है।

राजनीतिक गतिरोध में खुद को शामिल रखने और एक ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति में फंसे रहने के बजाय हमने एक वैकल्पिक मार्ग अपनाया है। इसकी राजनीतिक कीमत कम है और यह राज्यों को ज्यादा लचीलापन प्रदान करता है। जो राज्य इससे फायदा पाना चाहते थे, अब पा सकते हैं।’

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