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जब 'दंगाई मर्दों' को किन्नरों ने कर दिया नतमस्तक

Tue, 28 Oct 2014 05:57 PM IST
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:57 PM IST
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eunuchs gave lesson of peace to trilokpuri

वे समाज से बहिष्कृत हैं। उन्हें हंसी का पात्र बना

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दिया गया है। उन्हें डराया भी जाता है, धमकी भी दी जाती है। हालांकि, वही किन्नर उस समय सामाजिक सद्भाव की मिसाल बनकर सामने आए, जब चंद गुंडे त्रिलोकपुरी को नफरत की आग में झोंकना चाहते थे।

अपने राजनीतिक आकाओं के लिए उन्हें वोटों की फसल तैयार करनी थी, लेकिन 15 किन्नरों का समूह बेखौफ होकर तलवार और पत्थरों से लैस दंगाइयों की भीड़ के सामने खड़ा हो गया। त्रिलोकपुरी में उन्होंने न केवल हिंसा के तांडव को रोका, बल्कि हिंदू और मुस्लिम के खाके में बंट गए पड़ोसियों को एकता का पाठ भी पढ़ाया।

उन्होंने झाड़ू उठाकर सड़क पर पड़ी इंटों को साफ किया। उन्होंने हिंदुओं और मुस्लिमों के हाथ में भी झाड़ू दी और कहा कि अपने घरों के सामने पड़े इंट और कांच के टुकड़े साफ कर डालो। उनकी कोशिश से इलाकों में फैली नफरत पर भी झाड़ू लग सका।

दंगाइयों के सामने डंटकर खड़ा हो गया किन्‍नरों का समूह

eunuchs gave lesson of peace to trilokpuri

दीपावली की रात ‌त्रिलोकपुरी के सभी ब्लॉक में दंगाइयों पत्‍थरबाजी कर रहे ‌थे। तलवारों और पत्‍थरों से लैस भीड़ ने ब्लॉक 35 में भी घुसने की कोशिश की लेकिन 15 किन्नरों का समूह डंटकर ब्लॉक के मुहाने पर खड़ा हो गया।

उन्होंने दंगाइयों को ब्लॉक में घुसने से रोक दिया। किन्नरों ने उन्हें धमकी दी कि अगर वे वापस नहीं लौटे तो वे अपने कपड़े उतार देंगे। राहगीरों से पैसे वसूलने के लिए किन्नर ये तरीका रोजाना आजमाते हैं। हालांक‌ि इस बार उन्होंने ये तरीका दंगाइयों को रोकने के लिए अपनाया था।

उन्हें डराने की कोशिश भी की लेकिन वे बैखौफ खड़े रहे। दंगाइयों की उनके आगे एक न चली। अंततः वे लौट गए।

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किन्नर अब भी दे रहे इलाके में पहरा

eunuchs gave lesson of peace to trilokpuri

अगले दिन किन्नरों ने झाड़ू उठाया और अपने ब्लॉक को खुद साफ किया। उन्होंने हिंदुओ और मुस्लिमों के ‌हाथ में भी झाड़ू थमाई और उन्हें अपने-अपने घरों के आगे पड़े इंट और कांच के टुकड़े साफ करने की नसीहत दी। एकता का पाठ पढ़ाने का उनका अपना तरीका था।

दिवाली की झड़प के बाद से ही ब्लॉक 35 को छोड़कर त्रिलोकपुरी के सभी ब्लॉक में तनाव है। किन्नरों के समूह ने भरसक कोशिश की है कि दंगाइयों उनके इलाकें में तनाव न फैला सके।

इलाके में 1976 से रह रहीं किन्नरों की मुखिया लैला सा ने बताया‌ कि पथराव के बाद सड़क की हालत ऐसी हो गई थी, उस पर चलना मु‌श्किल था। दंगों के कारण सफाईकर्मी भी नहीं आ रहे थे। किसी न किसी इंटों का हटाना था। हम यहां रहते हैं, इसलिए हमने ये जिम्‍मेदारी उठाई।

किन्‍नरों की समूह यही तक नहीं रुका है। उनके ब्लॉक में हिंसा न हो, इसलिए वे और दूसरे नागरिक रोजाना रात को ब्लॉक के गेट पर बारी-बारी पहरा भी दे रहे हैं। हालांकि किन्नरों के आश्वासन के बाद भी कुछ परिवारों अपना घर छोड़ दिया और दूसरी जगहों पर चले गए हैं।

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