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भारतीय बोले- नहीं हुआ अपहरण, तो क्या झूठ बोल रही है सरकार?

Sun, 02 Aug 2015 07:49 PM IST
Updated Sun, 02 Aug 2015 07:49 PM IST
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escaped indians said isis did not kidnapped us

लीबिया में सिर्त शहर के पास रिहा किए गए दो भारतीयों का कहना है कि उनका अपहरण नहीं किया गया था। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि हालांकि उन्हें यह नहीं समझ आ रहा कि उन्हें क्यों 'ले जाया गया था'।

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भारतीय विदेश मंत्रालय ने कुछ दिन पहले पुष्टि की थी कि सिर्ते विश्वविद्यालय में बतौर शिक्षक काम कर रहे चार भारतीय लोगों का अपहरण किया गया था।

ये सभी भारत जाने के लिए निकले थे कि सिर्ते से करीब 50 किलोमीटर दूर बंदूकधारियों ने उन्हें बंधक बना लिया था। हालांकि इसमें से कनार्टक के रहने वाले लक्ष्मीकांत रामकृष्ण और एमएस विजयकुमार को शुक्रवार शाम को छोड़ दिया गया।
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दोनों ही विश्वविद्यालय में पिछले पांच से आठ साल से एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स और इंग्लिश पढ़ाते हैं।

'अपहरण सही शब्द नहीं'

escaped indians said isis did not kidnapped us

फिलहाल त्रिपोली में मौजूद लक्ष्मीकांत ने बीबीसी को बताया, ''मुझे नहीं लगता कि अपहरण सही शब्द है। उन्होंने ऐसा क्यों किया मुझे नहीं पता। जो लोग हमें ले गए थे उनकी उम्र 16 से 18 के बीच रही होगी।''

उन्होंने आगे कहा, ''उन सभी के पास क्लाशनिकोव राइफलें थीं और वो काफी उत्साही थे।'' लक्ष्मीकांत ने कहा कि मुमकिन है कि उन लोगों से कहा गया हो कि जो भी संदिग्ध लगे उसे बंधक बना लें।

लक्ष्मीकांत का कहना था,''इसका आधार धर्म या कुछ भी हो सकता है, लेकिन हमें इसकी असल वजह नहीं पता। शायद उन्हें हम पर किसी बात को लेकर शक हुआ होगा जिसके चलते उन्होंने ऐसा किया।''

'कुछ हमारे छात्र थे'

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लक्ष्मीकांत और विजयकुमार हमेशा के लिए भारत वापस आने के लिए निकले थे, जबकि इनके साथी गोपी कृष्ण और सीएच बलराम छुट्टियां मनाने भारत आ रहे थे। गोपी कृष्ण का संबंध तेलंगाना से हैं और सीएच बलराम आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं।

लक्ष्मीकांत कहते हैं, ''जो लोग हमें लेने आए थे उसमें से कुछ हमारे छात्र भी थे, लेकिन वो हमें देखकर वापस चले गए। उसके बाद कुछ अन्य लोगों ने अपने शेख को फोन लगाया और हमें गाड़ियों में चलने के लिए कहा।''

वो आगे बताते हैं, ''उन्होंने न ही हमारे हाथ बांधे और न ही हमारी आंखों पर पट्टियां बांधी। उन्होंने हमारा अच्छी तरह से ख़्याल भी रखा।

विजयकुमार की पत्नी सुनीता कहती हैं, ''मेरे पति ने बताया कि उनसे पूछा गया था कि वो मुसलमान हैं या हिन्दू। तब मेरे पति ने कहा कि वो हिन्दू हैं और शिक्षक भी।''

वो बताती हैं, ''यह सुनने के बाद शेख ने कहा कि उन्होंने उनके देश के बच्चों को तालीम दी है इस वजह से वो उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।''

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दो साथी अभी भी बंधक

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विजयकुमार कहते हैं कि उन्हें बताया गया था कि चूंकि वो दोनों सिर्त में काम कर रहे थे शायद इसलिए उन्हें छोड़ दिए जाने की संभावना अधिक है। लेकिन उनके बाकी दो साथी सिर्त विश्वविद्यालय से जुड़े एक कॉलेज में पढ़ाते थे जो 200 किलोमीटर दूर ज़ुफरा में था।

उनकी पत्नी कहती हैं, ''यह इलाका अभी भी विद्रोहियों के कब्जे में नहीं है। ऐसे में मेरा मानना है कि वो लोग पूरी तसल्ली होने के बाद ही उन्हें छोड़ेंगे।''

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