ताजमहल में चल रहे एक और 'खेल' का खुलासा, सभी हैरान
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ताजमहल पर टिकटों के खेल का फिर खुलासा हुआ है। इस बार पुरानी टिकटों के जरिए ताजमहल में पर्यटकों को प्रवेश कराने का मामला सामने आया है। बुधवार को पश्चिमी गेट से 57 सैलानियों को पुरानी तारीखों के टिकटों से प्रवेश कराया गया था, जो अंदर पहुंचने के बाद पकड़ में आ गए।
इन टिकटों पर छह साल पुरानी तारीख अंकित है, जबकि ताज में प्रवेश के लिए ई-टिकट वैद्यता महज दो दिन है। मामला खुला तो एएसआई ने जांच के आदेश दे दिए। बता दें कि केनरा बैंक के पास ई-टिकटिंग का जिम्मा है।
बुधवार शाम को पश्चिमी गेट पर ग्रुप के 57 सदस्यों को 2009 की प्रिंट की गई टिकटें थमा दी गईं। गेट पर चेकिंग के दौरान क्यूआर कोड जांच कर इन सभी को प्रवेश भी दे दिया गया, लेकिन अंदर पहुंचने पर जब मामला खुला तो एएसआई कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
ताजमहल सहित स्मारकों में ई-टिकट की वैद्यता महज दो दिन और रंगीन प्रिंटेड टिकटों की छह माह है। एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. भुवन विक्रम ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। केनरा बैंक द्वारा पुरानी तारीख की टिकटों के प्रिंट होने के पीछे साफ्टवेयर की गड़बड़ी बताई गई है। जांच के बाद ही कुछ कह पाना संभव है।
जीरो वैल्यू टिकट से हेराफेरी
ई-टिकटिंग की शुरुआत के बाद री-सेलिंग की जगह जीरो वैल्यू टिकट के जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। गेट बुकिंग पर बैठे कर्मचारी सैलानियों को जीरो वैल्यू टिकट जारी कर रहे हैं।
गेट पर कर्मचारी द्वारा क्यूआर कोड की स्कैनिंग में कोई दिक्कत नहीं आती। कभी किसी पर्यटक ने इसे नोटिस किया भी तो तकनीकी गड़बड़ी बताकर कर्मचारी पल्ला झाड़ लेते हैं। बता दें कि स्मारकों पर जीरो वैल्यू टिकट 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जारी की जाती है।