सिस्टम से लड़ते बुजुर्ग की यह कहानी आपको झकझोर देगी

Harendra Singh Moral Updated Fri, 10 Apr 2015 12:05 PM IST
engineer family killed in badaun
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रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता फर्जी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अपने पुत्र मुकुल गुप्ता को न्याय दिलाने के लिए 14 साल से संघर्ष कर रहे थे। बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने की तमन्ना उनके दिल में ही रह गई। सिस्टम के साथ न देने की कसक भी गुप्ता के दिल में थी।
दोनों बेटियां मायके में रह रही थीं। बेटे भी उनके साथ नहीं थे। एक बेटा दिल्ली और एक बरेली में रह रहा है। गुप्ता दंपति अकेले इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने में जुटे थे।

दरअसल, 30 जून 2007 को बरेली के थाना फतेहगंज पूर्वी में विजेंद्र गुप्ता के युवा पुत्र मुकुल गुप्ता को पुलिस ने बैंक लुटेरा बताकर एनकाउंटर में मार दिया था। मुकुल एक दवा कंपनी में काम करते थे। इस मुठभेड़ के खिलाफ विजेंद्र गुप्ता ने मोर्चा खोला। वह हाईकोर्ट तक गए।

फरवरी 2010 में हाईकोर्ट के आदेश पर मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। इसमें ट्रेनी आईपीएस जेआर गौड़ (वर्तमान में अलीगढ़ के एसएसपी), विकास सक्सेना (तत्कालीन एसओ, सीबीगंज बरेली), एसआई मूला सिंह, देवेंद्र सिंह, आरके गुप्ता, कांस्टेबल गौरी शंकर, दिनेश चंद्र, अनिल कुमार, कालीचरन (अब मृत), रवि प्रकाश और वीरेंद्र शर्मा आरोपी बनाए गए।
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पूरी नहीं हुई बेटे के कातिलों को सजा दिलाने की तमन्ना

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