इस समझौते से खत्म हुआ 'फर्जी पति' का झंझट
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बांग्लादेश से ऐतिहासिक समझौते के तहत सरहदी बस्तियों की अदला-बदली ने यहां रहने वाली महिलाओं को एक बड़ी त्रासदी से निजात दिला दी है।
यह त्रासदी थी भारतीय अस्पतालों में प्रसव के दौरान फर्जी पति का सहारा लेने की। ये बस्तियां अब भारत का हिस्सा बन चुकी हैं, इसलिए उनके सामने ऐसी कोई मजबूरी नहीं रही है।
ऐसी ही एक बांग्लादेशी बस्ती पोआटुरकुठी में रहने वाली 19 साल की झरना बीबी को बेहद बेसब्री से पहली अगस्त का इंतजार था। पहली अगस्त से इस बस्ती के लोग भारतीय नागरिक बन गए। झरना इसी महीने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली हैं।
वह बताती हैं कि दो साल पहले वह बीएसएफ जवानों से बच कर कूचबिहार जिले के दिनहाटा स्थित अपने मामा के घर गई और एक रिश्तेदार को पति घोषित किया।
झरना को अब अपने दूसरे बच्चे के लिए यह समस्या नहीं रहेगी। झरना की तरह ऐसी बस्तियों में रहने वाली दूसरी महिलाओं के तमाम बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र में उनके पिता के नाम भी फर्जी हैं।
झरना के ससुर मुजीबुर कहते हैं कि प्रसव के लिए फर्जी पति का सहारा लेना महिलाओं के लिए अपमानजनक था, लेकिन कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
फर्जी पति बनाना मजबूरी
जो महिलाएं समझौते से पहले फर्जी पति का सहारा लेकर भारतीय सीमा के अस्पतालों में नहीं पहुंच पाती थीं, उनमें से कइयों की प्रसव के दौरान मौत तक हो चुकी है। इसकी वजह बस्तियों में अस्पताल और प्रशिक्षित नर्स या दाई का नहीं होना है।
भारतीय अस्पतालों में नहीं किया जाता भर्ती
भारतीय अस्पताल के अधिकारी सरहदी बस्तियों की महिलाओं को दाखिला देने से इनकार कर देते थे। नियमानुसार उनका भारतीय होना जरूरी था, ऐसे में फर्जी पति बनाना मजबूरी होती थी। सरहद पर खुशी है कि अब बच्चे के पिता को लेकर झूठ नहीं बोलना पड़ेगा।