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तकरार की सियासी गर्मी में ठंडा पड़ा सरकार का आर्थिक एजेंडा

Thu, 24 Dec 2015 08:48 AM IST
Updated Thu, 24 Dec 2015 08:48 AM IST
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end winter parliament session

बीते मानसून सत्र की तरह ही शीतकालीन सत्र में भी संसद में तकरार की सियासी गर्मी कामकाज पर भारी रही। सरकार का आर्थिक एजेंडा एक बार फिर से धरा का धरा रह गया। बहुमत के दम पर लोकसभा में बढ़त हासिल करने वाले सरकार राज्यसभा में अपने अल्पमत होने की काट नहीं ढूंढ पाई।

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उच्च सदन में सत्र की 20 बैठकों में से 17 बैठकें सियासी तकरार के नाम रही। हालांकि अंतिम तीन दिनों में इस सदन में किशोर न्याय बिल सहित 9 बिलों को आनन फानन कानूनी जामा पहनाया।
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चूंकि सत्र सरकार और खासतौर कांग्रेस के बीच तीखी तकरार के बीच संपन्न हुआ है। इसलिए सरकार के आर्थिक एजेंडे की राह बजट सत्र में भी आसान नहीं दिख रही। कांग्रेस ने जहां सरकार के खिलाफ तीखे तेवर अपनाने के साफ संकेत दिए हैं, वहीं भाजपा ने संसद में कांग्रेस के कथित रवैये के खिलाफ देश भर में अभियान चलाने की घोषणा की है।
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शीत सत्र से पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को चाय पर आमंत्रित किया था, तब संसद में कामकाज की उम्मीद बंधी थी। मगर इसी बीच नेशनल हेराल्ड, असहिष्णुता, डीडीसीए में भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों पर संसद के दोनों सदनों में सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी कम होने के बदले लगातार बढ़ती चली गई।

लोकसभा में अपने बहुमत के बदौलत सरकार ने 13 विधेयक पारित और 9 विधेयक पेश करने के साथ सौ फीसदी से ज्यादा काम करा लिया, मगर राज्यसभा में सरकार की एक नहीं चल पाई। उच्च सदन में महज 46 फीसदी ही काम काज हो पाया और 55 घंटे का वक्त जाया हुआ।  

आर्थिक एजेंडे पर ग्रहण

end winter parliament session

इस सत्र में सरकार अपने आर्थिक एजेंडे से जुड़े वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), रियल इस्टेट, विद्युत कानून संशोधन, एमएसएमई बिल कानूनी जामा नहीं पहन पाया। इसके अलावा सरकार को दिवाला और शोधन अक्षमता बिल को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का फैसला करना पड़ा। समिति अब इस संबंध में बजट सत्र के पहले हफ्ते के अंतिम दिन रिपोर्ट देगी।

पारित होने वाले अहम बिल
किशोर न्याय, भारतीय मानक ब्यूरो, उच्च न्यायालय-उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश वेतन और सेवा शर्त संशोधन, वाणिज्यिक न्यायालय, मध्यस्थम सुलह और राष्ट्रीय जलमार्ग बिल

कामकाज का रिकार्ड
लोकसभा की 20 बैठकों में 117 घंटे 14 मिनट काम हुए। हंगामे के कारण 8.37 घंटे बर्बाद हुए। हालांकि इसकी क्षतिपूर्ति के लिए 17.10 घंटे अतिरिक्त कामकाज हुआ। राज्यसभा में 20 बैठकों में महज 57 घंटे ही काम हुआ। 55 घंटे हंगामे की भेंट चढ़े। अंतिम तीन दिन से पहले सदन में कोई विधायी कामकाज नहीं हुआ।

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