डॉक्टरों की लापरवाही ने ले ली MBBS छात्र की जान!
उत्तर प्रदेश के मेरठ में लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में अब तक गंभीर रोगियों को वेटिंग में डालकर उनकी जान से खेला जाता रहा है, लेकिन अब यह लापरवाही चिकित्सकों पर ही भारी पड़ने लगी है।
एमबीबीएस के एक छात्र के पेट में इंफेक्टशन होने पर कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक ने इमरजेंसी की फीस लेने के बाद भी 45 मिनट वेट कराया। छात्र बुरी तरह तड़पता रहा, लेकिन चिकित्सक ने उसकी नब्ज तक नहीं पकड़ी। हालत बिगड़ने पर उसे एक अन्य नर्सिंग होम में ले जाया गया, वहां भी इमरजेंसी की फीस लेने के बाद उसे 20 मिनट तक उपचार नहीं दिया गया।
मेडिकल की इमरजेंसी तक पहुंचते-पहुंचते इस भावी चिकित्सक ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज में जमकर हंगामा हुआ। कॉलेज प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने डॉ. तुंगवीर से इस्तीफा लिखवा लिया। उधर, घटना से नाराज छात्र और जूनियर डॉक्टर मामले में एफआईआर दर्ज करा कानूनी कार्रवाई कराने की मांग पर अडे़ हैं।
'संजीव ने इमरजेंसी में दिखाया था'
सहारनपुर के सरस्वती विहार (आईटीसी रोड) निवासी संजीव पुत्र मदनपाल मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहा था और कई दिनों से वायरल व पेट में इंफेक्शन से पीड़ित था। बृहस्पतिवार को संजीव ने इमरजेंसी में दिखाया था, जहां डॉक्टरों ने नार्मल इंफेक्शन बताकर उसे भेज दिया। लेकिन उसके बाद भी उसकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ।
शुक्रवार शाम अचानक से पेट में दर्द बढ़ा तो संजीव अपने भाई डॉ. विकास के साथ डॉक्टर तुंगवीर सिंह आर्य के घर पहुंच गया। डॉ. विकास का आरोप है कि घर पर दिखाने के लिए फीस भी जमा की, लेकि न करीब 45 मिनट उसे बैठाए रखा गया। इसी बीच संजीव की तबीयत बिगड़ती देख डॉ. विकास और अन्य कुछ छात्र उसे लेकर दौड़े।
उन्होंने प्राइवेट में डॉ. प्रशांत सोलंकी के क्लीनिक पर इमरजेंसी में फीस जमा करा तत्काल देखने का आग्रह किया, लेकिन वहां पर भी उसे करीब 20 मिनट तक बैठाए रखा गया। उपचार न मिलने के कारण संजीव की हालत और ज्यादा बिगड़ती चली गई। इसके बाद डॉ. विकास उसे लेकर इमरजेंसी की ओर भागे लेकिन मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
इंफेक्शन बढ़ने से फट गईं आंत
चिकित्सकों का कहना था कि पेट में इंफेक्शन का लेबल बहुत ज्यादा बढ़ गया था, जिसकी वजह से संजीव की आंत फट गई। मेडिकल साइंस में ऐसी स्थित को परफारेशन (आंतों का फटना) कहा जाता है।
आंत फट जाने के कारण मल्टी ऑर्गन फेलियर हुआ, जिसमें लीवर, किडनी व हार्ट काम करना छोड़ देता है। ऐसी स्थिति में मरीज को बचाना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि इसमें चिकित्सक को कुछ मिनट ही मिलते है, जिनका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
छात्र की मौत के बाद एमबीबीएस के छात्रों के साथ जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी में जमकर हंगामा किया। छात्रों का आरोप था कि कॉलेज में वरिष्ठ डॉक्टर बैठते नहीं हैं, जिसकी वजह से मेडिकल कॉलेज के ये हालात है।
'अप्रैल में होनी थी शादी'
संजीव के मां बाप ने उसके लिए लड़की देखकर रिश्ता भी तय कर दिया था, संजीव की मौत की सूचना के बाद उसकी होने वाली ससुर से भी लोग इमरजेंसी में पहुंचे। रोते हुए उन्होंने कहा, मेरे बच्चे ने क्या-क्या सपने देखे थे। हम दोनों परिवारों ने छह अप्रैल में बच्चों की शादी करने का फैसला लिया था, जिसको लेकर दोनों परिवारों की तरफ से तैयारियों भी की जा रही थी।
तीन भाइयों में सबसे बड़ा था संजीव
संजीव का छोटा भाई विकास मेडिकल कॉलेज में बायो केमेस्ट्री विभाग में डेमोस्टेटर है, बताया गया है कि विकास का एमबीबीएस में संजीव से पहले साल 2009 में चयन हो गया था। संजीव का साल 2010 में एमबीबीएस में चयन हुआ था और अब इंटर्नशिप कर रहा था।
डॉ. केके गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज ने कहा कि यह बहुत बड़ी लापरवाही है, जिससे पता चलता है कि हमारे दिल के अंदर दया नाम की कोई चीज नहीं रही है। तत्काल प्रभाव से डॉ. तंगुवीर सिंह से नौकरी से ही इस्तीफा ले लिया गया है। इसके अलावा ओर भी लोगों पर कार्रवाई की जा रही है।