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80 हजार लोगों की कंपनी में ईमेल हो गया बैन

Thu, 02 Apr 2015 10:46 AM IST
Updated Thu, 02 Apr 2015 10:46 AM IST
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email ban of many companies

क्लेयर बर्ज ऑफ़िस के काम में ईमेल का ख़ूब इस्तेमाल करती थीं। 2001 में वो दस दिनों की छुट्टियों में मोरक्को गईं। लौटीं तो इनबॉक्स में 10 हज़ार नए ईमेल थे।

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क्लेयर इतने दबाव में आ गईं और परेशान हुई कि उन्होंने ईमेल का इस्तेमाल ही बंद करने का फ़ैसला किया। हमेशा के लिए नहीं, पहले एक साल के लिए।

उन्होंने ईमेल पर ऑटोमेटिक रिप्लाई डाल दिया कि निजी और कामकाजी जरूरतों पर फ़ोन करें। इसके बाद तो क्लेयर की दुनिया ही बदल गई।

वो बताती हैं, "ईमेल बेहद सेल्फिश (स्वार्थी) टूल है।" क्लेयर बर्ज अब डब्लिन में 'गैट आर्गेनाइजड' नाम से कंसलटेंसी चलाती हैं।

अपने अनुभव के आधार पर वे कहती हैं, "दूसरे व्यक्ति के समय की परवाह किया बिना लोग एक दूसरे के इनबॉक्स में काम फ़ेंकते रहते हैं। परिणाम ये होता है कि लोग अपने इनबॉक्स के ग़ुलाम बन जाते हैं। सुबह उठते ही इनबॉक्स में मेल चेक करने लग जाते हैं और रात को सोने तक ऐसा करते रहते हैं।"
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80 हजार लोगों की कंपनी

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दफ्तरों में काम करने वाले लोग क्लेयर की समस्या से रोज़ जूझते हैं और दिन-रात ईमेल का आना लगा रहता है। पूरी दुनिया में कारपोरेट कामकाज इससे प्रभावित हो रहा है। यहीं नहीं, इसका असर कार्यकुशलता (एफ़िशियेंसी) और कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी हो रहा है।

एक रिसर्च के मुताबिक नए ईमेल को पढ़ने के बाद, दोबारा काम पर लगने में 64 सेकेंड बर्बाद होते हैं। कुलमिलाकर दिन भर में कई घंटे का काम प्रभावित होता है।

क्लेयर बर्ज ने 2001 में जब ईमेल का इस्तेमाल बंद किया, ठीक उसी साल फ्रांसीसी आईटी कंपनी एटोस के सीईओ थियरी ब्रेटन ने 80 हज़ार कर्मचारियों की अपनी कंपनी में इंटरनल ईमेल बैन कर दिया।

इसके बाद दुनिया में कई कंपनियों ने ईमेल के इस्तेमाल पर पाबंदी लगानी शुरू कर दी ताकि कर्मचारियों के कामकाजी और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाया जा सके।

हालांकि रिसर्च फ़र्म गैलप के वर्क प्लेस मैनेजमेंट के चीफ़ साइंटिस्ट जिम हर्टर चेतावनी भरे लहजे में कहते हैं कि पूरी तरह से पाबंदी का नुकसान भी हो सकता है।

कर्मचारियों का फ़ायदा

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जिम हर्टर कहते हैं, "सतही तौर पर ये एकदम सही लगता है। लेकिन असल में कंपनियों को अपने कर्मचारियों के तनाव की असली वजहों को तलाशना चाहिए।"

हर्टर के मुताबिक कंपनियों की ईमेल पाबंदी से उन कर्मचारियों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है जो काफ़ी लचीले अंदाज़ में काम करते हैं। जर्मनी के कार निर्माताओं ने ईमेल के लिमिटेड इस्तेमाल की रणनीति अपनाई है।

न्यूयार्क टाइम्स के एक स्तंभकार ने उन तरीकों के बारे में लिखा है जिनका इस्तेमाल वो ईमेल की जगह पर अपने संपादकों के साथ संवाद के लिए इस्तेमाल करते हैं।

ब्रिटेन में हजारों घरों को प्रबंधन संभालने वाली कंपनी हाल्टन हाउसिंग ट्रस्ट ने भी ईमेल का इस्तेमाल को कम किया है।

हाल्टन के सीईओ निक एटकिन ईमेल के मुखर आलोचक है। उन्होंने अपने ब्लाग में वो चुनौतियां गिनाई हैं जिनका उन्हें सामना करना पड़ रहा है ताकि वे अपने 280 कर्मचारियों को बार-बार इनबॉक्स देखने की आदत से बचा सकें।

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कुछ घंटों तक इंटरनल ईमेल के इस्तेमाल का तरीका

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वान मीटर, अमरीका में इलेक्ट्रिक पार्ट्स के डिस्ट्रीब्यूटर हैं और उन्होंने कंपनी कल्चर को बेहतर करने और लाईफ़-वर्क संतुलन बेहतर करने के लिए दफ़्तर के काम के बाद ईमेल के मुद्दे को सुलझाने के प्रसाय किया के लिए कुछ घंटों तक इंटरनल ईमेल के इस्तेमाल का तरीका अपनाया है।

वहीं 400 कर्मचारियों की कंपनी की सीईओ ल्योरा मैकब्राइड मानती हैं कि कामकाज और निजी जीवन में संतुलन की कोशिश तो ठीक है लेकिन इस तरह के पत्थर पर लकीर जैसे फ़ैसलों से हल नहीं निकलता। मैकब्राइड के कामकाजी जीवन में अहम मोड़ तब आया जब वे अपनी एक आदत से तंग आ गईं।

वे बताती हैं, "मेरे लिए परिवार पहले आता है। लेकिन जब मैं घर पहुँचती थी तो मैं ख़ुद को कार में लॉक कर लेती थी और बचा हुआ काम, ईमेल आदि को निपटाने में लग जाती थी। मैरे चार बच्चे मेरी कार के आसपास घूमते और बीच-बीच में कार के शीशे पर टैप करते रहते थे। जब तक कंपनी वर्क-लाईफ़ बैलेंस के लिए रणनीतियां तय नहीं करती तब तक उसकी चिंताएँ कोवल दिखावटी हैं।"

मैकब्राइड ने वेन मीटर की सीनियर लीडरशिप टीम से मिलकर तय किया कि सप्ताह के दौरान शाम पांच बजे से सुबह सात बजे तक और वीक-एंड में इंटरनल ईमेल और फ़ोन कॉल करना बंद करें।

संवाद के दूसरे विकल्प

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बात कर्मचारी के निजी समय का सम्मान करने की है। मैकब्राइड कहती हैं, "मैं पहले जहां काम करती थी, वहां कुछ लोग मध्यरात्री को ईमेल भेजना गर्व की बात समझते थे। जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो शर्म आती है।"

मैकब्राइड की कंपनी ने अवकाश के दौरान भी कर्मचारियों को ईमेल भेजना बंद किया। मैकब्राइड के मुताबिक कर्मचारी अभी भी शाम में काम करते हैं और अगर बहुत ज़रूरी ईमेल भेजना हो तो अगले दिन सुबह भेजा जाता है, जब तक कि कोई इमरजेंसी न हो।

जब मैकब्राइड को कोई ग़ैर ज़रूरी ईमेल देर शाम मिलता है तो वो अगले दिन उस कर्मचारी से मिलकर ये मुद्दा उठा लेती हैं। अब ये कंपनी की कल्चर का हिस्सा बन गया है।

क्लेयर बर्ज ने एक साल के अपने प्रयोग में पाया कि ऑफ़िस ईमेल से छुटकारा पाया जा सकता है। कंपनियों को ईमेल के बदले दूसरे संवाद के रास्ते तलाशने चाहिए।

जब उन्होंने 2012 में पहली बार कोशिश की थी तो ये सफल नहीं रहा था क्योंकि स्लैक जैसे ऑफिस मैसेजिंग एप विकसित नहीं हुए थे।

ब्रितानी आईटी कंसलटेंसी रेयरली इम्पासिबल के ली मैलन कहते हैं, "मैं अपना फ़ोन दिन भर में 150 बार चेक करने लगा था। करता हूं। इससे काफी ध्यान भंग होता है।"

2014 में अचानक एक दिन उन्होंने घोषणा कर दी कि कोई ईमेल नहीं होगा। कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली। मैलन ने अपने ऑफिस में एक 'नॉटी चेयर' बना दिया, मेल का इस्तेमाल करने वालें को वहाँ बैठना होता था। दिलचस्प ये है कि उन्हें ही सबसे ज्यादा इस कुर्सी पर बैठना पड़ा है, क्लाइंट के मेल को टीम को फ़ारवर्ड करने के कारण।

हालांकि मैलन मानते हैं कि ईमेल से पीछा छुड़ाने के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि आपको बेहतर कम्यूनिकेशन टूल्स तलाशने होंगे। टास्क देने के लिए भी और डाक्यूमेंट शेयर करने के लिए भी।

ईमेल मुक्त दुनिया
मैलन कहते हैं, "अब हम लोग चार अलग अलग उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं।" ये छोटा दफ़्तर है इस लिहाज़ से यहां फ़ोन और एसएमएस के ज़रिए काम हो जाता है। कर्मचारी स्काइप, ड्रॉप बॉक्स और स्लैक के ज़रिए जानकारी शेयर कर रहे हैं।

मैलन कहते हैं, "हमारी टीम के बीच संवाद बेहतर हुआ है। और कामकाजी समय में 20 फ़ीसदी समय की बचत भी हुई है। समस्याओं का तुरंत निदान भी हुआ है।"

बावजूद अपने उदाहरण के, क्लेयर बर्ज मानती हैं कि ईमेल मुक्त दुनिया अभी कुछ समय दूर है। वे कहती हैं, "मुझे आज भी रोज़ाना ईमेल चेक करना होता है क्योंकि मैं दुनिया के बाक़ी लोगों को नहीं बदल सकती। अब भी हमारे आसपास ईमेल का इस्तेमाल करने वाले लोग हैं।"

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