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यूपी में इंदिरा आवास का सच, छत पर बन रहा आवास
आगरा/ब्यूरो
Updated Tue, 04 Dec 2012 10:16 AM IST
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गरीबों के हक पर अमीर डाका डाल रहे हैं। इंदिरा आवास योजना के तहत मिलने वाले आवासों को वह अपने नाम पर आवंटित करा रहे हैं। पूरे आगरा जिले में इन आवासों के लिए लूट मची है। हालत यह है कि पक्के मकान पर इंदिरा आवास बनाए जा रहे हैं। पैसे के जोर पर नियम-कानून को ठेंगे पर रखकर सारा कुछ हो रहा है।
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अमर उजला की पड़ताल में यह बात सामने आई है। हद यह है कि चयन करने वाले जिम्मेदार लोग चिल्लाकर कह रहे हैं ऊपर तक हिस्सा दिया गया है।
केस नबंर एक
खंदौली ब्लाक के चौकड़ा गांव में भगवान सिंह पुत्र बलबीर का पक्का मकान है। अपात्र होने के बाद भी उन्हें इंदिरा आवास आवंटित कर दिया गया। वर्तमान में वह मकान पर इंदिरा आवास बनवा रहे हैं। पहली किस्त 33 हजार रुपये मिल भी चुकी है।
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केस नंबर दो
कुछ ऐसा ही भूरी सिंह पुत्र मान सिंह के साथ है। गांववासियों ने बताया कि भूरी सिंह के परिवार के लोग आगरा में रहते हैं। उनके बच्चे बाहर नौकरी करते हैं। शहर में उनका मकान है। लेकिन उन्हें भी आवास आवंटित कर दिया गया है।
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केस नंबर तीन
इसी गांव के हरि सिंह पुत्र चंद्रकेत सामान्य जाति के हैं। इनका नाम स्थायी सूची में नहीं है। इनका भी अपना मकान है। ये पूरी तरह से अपात्र हैं। लेकिन उसके बाद भी इंदिरा आवास दे दिया गया है। गांव में कुल 25 लोगों को इंदिरा आवास दिए गए हैं। इनमें से 15 अपात्र पाए गए।
केस नंबर चार
जिले के ऑवलखेड़ा गांव की आध्यात्मिक गूंज विदेशों तक है, वहां भी भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हो चुकी हैं। प्रधानों से लेकर विभागीय अधिकारियों ने मिलकर आवासों का बंदर-बांट किया है। कमलेश पत्नी मलखान सिंह का अपना पक्का मकान है। स्थायी सूची में भी उनका नाम नहीं है। उसके बाद भी उन्हें इंदिरा आवास दिया गया है।
केस नबंर पांच
ऑवलखेड़ा गांव में ही सकुलेश पत्नी खजांची का चयन इंदिरा आवास के लिए किया गया है। गांव में खजांची नाम के दो व्यक्ति हैं, पर उनकी पत्नी का नाम सकुलेश नहीं है। पूरे गांव में सकुलेश नाम कोई व्यक्ति नहीं मिला।
केस नंबर छह
महावीर पुत्र भगवान सिंह। इनके बारे में बताया गया अब वे गांव में नहीं रहते। इसके बावजूद इनके नाम पर इंदिरा आवास आवंटित किया गया है।
इस गांव में कुल 17 लोगों को आवास दिए गए हैं जिसमें 10 अपात्र हैं। लोगों को एक किस्त धनराशि भी जारी हो गई है। अधिकतर लोगों के मकान भी बनने शुरू हो गए हैं।
प्रधान की मुट्ठी में अधिकारी
चौकड़ा गांव में नियम-कायदे प्रधान कैलाश चौहान के अनुसार चलते हैं। इस संबंध में सवाल करने पर उनका दो टूक जवाब यह रहा कि उन्होंने अधिकारियों को पैसा दिया है। हिस्सा शासन तक भेजा गया है। उन्होंने सीधे आला अधिकारी तक को इसमें शामिल होना बताया। गांव के दर्जनों लोगों ने प्रधान के सामने ही शिकायत की कि बिना खुली बैठक के ही लोगों को आवास आवंटित कर दिया गया।
आपको बता दें कि यह रिपोर्ट सिर्फ दो ग्राम पंचायतों की है। जिले में कुल 15 ब्लाक हैं। इस बार कुल 3771 लोगों का चयन किया गया है। जिसमें 1561 लोगों को पहली किश्त दी जा चुकी है। एक आवास पर 45 हजार रुपये मिलते हैं।
इंदिरा आवासों के भ्रष्टाचार में यूपी का चौथा स्थान
अभी हाल में ग्रामीण विकास मंत्रालय की आई रिपोर्ट में इंदिरा आवासों के चयन में यूपी को भ्रष्टाचार के क्रम में चौथे नंबर पर शामिल किया गया है। प्रदेश के 17.98 फीसदी ऐसे गांव हैं, जहां स्थायी प्रतीक्षा सूची नहीं तैयार की गई है। 14 प्रतिशत आवासों की हालत बेहद खराब पाई गई है। मंत्रालय ने पिछले पांच साल में बने इंदिरा आवासों का सर्वे कराया है।