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हाथियों की कब्रगाह बनती जा रही ये जगह

Fri, 04 Jul 2014 01:06 PM IST
रीता तिवारी/अमर उजाला, कोलकाता
रीता तिवारी/अमर उजाला, कोलकाता Updated Fri, 04 Jul 2014 01:06 PM IST
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elephants death on railway track in bengal

केंद्र और राज्य सरकारों की लापरवाही की वजह से पश्चिम बंगाल के घने जंगलों से होकर गुजरने वाली रेल पटरियां हाथियों की कब्रगाह बनती जा रही हैं।

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जलपाईगुड़ी में बक्सा वन्यजीव अभयारण्य से गुजरने वाली ट्रेन से कट कर इसी सप्ताह दो हाथियों के मारे जाने के बाद एक बार फिर इस समस्या की गंभीरता सतह पर आ गई है।
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राज्य सरकार और वन विभाग ने इस हादसे के लिए रेलवे को जिम्मेदार ठहराया है। जिले के डुआर्स इलाके में अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। बीते दो वर्षों में इस इलाके में ट्रेन से कट कर 67 हाथी मारे जा चुके हैं।
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राज्य में पिछले दो साल में मारे जा चुके हैं 67 हाथी

elephants death on railway track in bengal

बक्सा टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक आरपी सैनी कहते हैं, "जंगल के भीतर ट्रेनों की रफ्तार कम रखनी चाहिए, लेकिन ट्रेन चालक नियमों की परवाह नहीं करते।"

सिलीगुड़ी से अलीपुरदुआर के बीच रेल पटरियां गोरूमारा नेशनल पार्क और जल्दापाड़ा वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरती हैं। हर बार ऐसे हादसे के बाद वन विभाग और रेल प्रशासन कुछ दिनों तक सक्रिय रहता है, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

सैनी कहते हैं, "अगर सरकार सचमुच हाथियों की मौत पर अंकुश लगाना चाहती है तो सूरज डूबने के बाद इस इलाके में ट्रेनों की आवाजाही तुरंत रोकनी होगी। ऐसा नहीं होने पर इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी।"

पश्चिम बंगाल के वन मंत्री हितेन बर्मन कहते हैं, "इस समस्या पर अंकुश लगाने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए रेलवे के अधिकारियों से फिर बातचीत की जाएगी।"

रेलवे कर रहा नियमों की अनदेखी

elephants death on railway track in bengal

वर्ष 2002 में वर्ल्ड वाइड फंड फार नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में डुआर्स इलाके में छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने की योजना पर रोक लगाने की मांग की थी।

अदालत ने इस परियोजना को हरी झंडी दिखा दी थी और रेलवे को इस मामले में कुछ दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा था ताकि रेल पटरियां जानवरों के लिए जानलेवा साबित न हों। लेकिन उन नियमों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं। बड़ी लाइन बनने के बाद उस इलाके में ट्रेनों की रफ्तार काफी बढ़ गई है। इसी से हाथियों के अलावा दूसरे जानवरों की मरने की घटनाएं अब आम हो गई हैं।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने अपनी रिपोर्ट में इन हादसों के लिए वन विभाग और रेलवे कर्मचारियों के बीच तालमेल की कमी को भी जिम्मेवार ठहराया था। उसकी रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रेन चालक को सतर्क करने के लिए राजाजी नेशनल पार्क की तरह डुआर्स इलाके में भी अर्ली वार्निंग प्रणाली लगाई जानी चाहिए।

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