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केजरीवाल ने शीला सरकार के सिर फोड़ा बिजली बम

Fri, 01 Feb 2013 11:27 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 01 Feb 2013 11:27 PM IST
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electric companies are taking more bill says kejriwal

अरविंद केजरीवाल ने राजधानी में बिजली की बढ़ती कीमतों पर फिर दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) और बिजली कंपनियों पर साठगांठ का आरोप लगाया है।

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दस्तावेजी सबूतों के साथ मीडिया से रूबरू होते हुए केजरीवाल ने कहा कि इसका सीधा असर दिल्लीवालों की जेब पर पड़ा है। आम लोग आज करीब पचास फीसदी ज्यादा बिल का भुगतान कर रहे हैं। लोगों की गाढ़ी कमाई से टाटा व अंबानी की जेबें भरी जा रही हैं।
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इधर केजरीवाल के आरोपों पर दिल्ली के बिजली मंत्री हारून यूसुफ ने कहा कि वह लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। हमें अपनी जिम्मेदारी का अहसास है।

अरविंद ने कहा कि बिजली कंपनियां धोखाधड़ी कर रही हैं। एक तरफ जहां खर्च बढ़ाकर दिखाया जाता है, वहीं आय में कमी बताई जाती है। इस आधार पर बिजली कंपनियां नुकसान का हवाला देकर बिजली की कीमत बढ़ाने की मांग करती हैं।
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इसका उदाहरण देते हुए अरविंद ने बताया कि मौजूदा चेयरमैन पीडी सुधाकर ने दिल्ली के एक फीसदी उपभोक्ताओं की चेकिंग करवाई थी। इसमें पता चला था कि करीब 10 फीसदी उपभोक्ताओं के बिल शून्य हैं। खास बात यह कि यह उपभोक्ता बिल तो दे रहे थे, लेकिन कंपनियों के बही-खातों में यह नहीं दिख रहा था।

उन्होंने कहा कि इस गड़बड़ी को मानते हुए भी सुधाकर ने राजधानी के सारे कनेक्शनों की जांच कराने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि कंपनियां आज फायदे में हैं।

केजरीवाल ने बताया कि 2010 में इन कंपनियों ने 603 करोड़ का नुकसान होने की बात कही थी। मगर डीईआरसी के तत्कालीन चैयरमैन बृजेंद्र सिंह की जांच-पड़ताल में 3577 करोड़ रुपए के फायदे का खुलासा हुआ था।


इसके आधार पर उन्होंने बिजली की कीमत 23 फीसदी कम करने का फैसला लिया, लेकिन बिजली की कीमतों का नियंत्रण अपने हाथ से बाहर बताने वाली दिल्ली सरकार ने निर्देश जारी होने से पहले ही रुकवा दिया।

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