पश्चिम बंगाल में चुनावी हथियार बनेंगी नेताजी की गोपनीय फाइलें
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलें पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों में एक अहम हथियार साबित हो सकती हैं। कम से कम केंद्र की ओर से इन्हें जारी करने की टाइमिंग से तो यही लगता है कि भाजपा इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
केंद्र सरकार से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते साल सितंबर में राज्य सरकार के पास रखी ऐसी 64 फाइलों को सार्वजनिक किया था। उसके कुछ दिन बाद ही भाजपानीत केंद्र सरकार ने बोस से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की कवायद शुरू कर दी थी।
पश्चिम बंगाल में नेताजी के समर्थकों व प्रशंसकों की तादाद लाखों में है। उनका समर्थन कम से कम विधानसभा चुनावों में कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक सोची-समझी रणनीति के तहत ममता ने बीते साल 64 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर दिया था। उसके बाद वह फॉरवर्ड ब्लॉक के वरिष्ठ नेता अशोक घोष से उनके जन्मदिन के मौके पर मुलाकात करने भी गई थीं।
चुनावी नतीजे ही बताएंगे किसे फायदा, किसे नुकसान
इन सबको एक साथ जोड़ कर देखने पर तस्वीर खुद ही साफ हो जाती है। उन फाइलों
को सार्वजनिक कर ममता ने एक तीर से कई निशाना साधे थे। उन्होंने एक ओर तो
नेताजी के प्रशंसकों-समर्थकों को अपने पाले में कर लिया और दूसरी ओर इससे
भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को भी मात दे दी।
जिसके बाद ही नेताजी
के परिजनों ने केंद्र के पास रखी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग तेज कर
दी थी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अपने पास रखी फाइलों को
सार्वजनिक कर दोनों पक्ष अगले चुनावों में इसका सियासी फायदा उठाने का
प्रयास करेंगे। अब इसका ज्यादा फायदा किसे मिलेगा, यह तो चुनावी नतीजे ही
बताएंगे।