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जीत का ऐसा टोटका कि नंगे हो गए नेताजी

Sat, 29 Mar 2014 02:04 PM IST
Updated Sat, 29 Mar 2014 02:04 PM IST
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राजनीति क्या-क्या नहीं कराती। चुनाव जीतने और हारने के बीच क्या अंतर है, ये नेता ही बता सकता है। जीत का मतलब है कि पांच साल की शानो-शौकत और हार के मायने हैं पांच साल का वनवास।
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जाहिर है, ऐसी सूरत में नेता कोई मौका नहीं चूकना चाहते। जीत के लिए जो कुछ करना पड़े, वो तैयार रहते हैं। फिर इसके लिए ग्रह-नक्षत्रों को दुरुस्त करना हो या टोटकेबाजी, सब किया जाता है।
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जीत के लिए नेता किस हद तक जा सकते हैं, यह खबर बताती है। बंगलुरु के ज्योतिषाचार्य ने बिहार के एक नेता से कहा कि अगर वो जीतना चाहते हैं, तो नग्न होकर भैंस को भोजन कराएं। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आगे पढ़िए।
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कोई नंगा हुआ, किसी ने जूता खाया

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उत्तर भारत के एक और नेता को सलाह दी गई कि अगर वो चुनावी राजनीति में जीत का स्वाद चखना चाहते हैं, तो एक बार उन्हें जूतों से पिटाई खानी होगी। दोनों नेताओं ने सलाह पर अमल किया और 2009 लोकसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

टीओआई के मुता‌बिक गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्‍थान, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के नेताओं को सलाह देने वाले ज्योतिषाचार्य सोमायाजी केएन ने कहा, "अनिश्चितता हमारी पूंजी है। उनकी नाकामी हमारी कामयाबी है।"

सोमायाजी चुनावों के इस मौसम में इस कदर मसरूफ हैं कि उन्हें अपने दूसरे अपॉइंटमेंट रद्द करने पड़े हैं। जाहिर है, चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में उनके क्लाइंट में सबसे ज्यादा तादाद नेताओं की है।

टिकट से लेकर जीत तक, सभी के लिए पूजा

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सोमायाजी ने कहा, "उम्मीदवारों की पहली आकांक्षा पार्टी से चुनावी टिकट मिलने की रहती है। इसके बाद उन्हें डर सताता है कि अंतिम पलों में कोई और नेता वो टिकट ले उड़ेगा। इसके लिए पूजा-पाठ कराते हैं।"

उन्होंने कहा, "इसके बाद नामांकन दाखिल करने के लिए मुहूर्त देखा जाता है। कुछ नेता अपनी कामयाबी के लिए उपाय जानना चाहते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो अपने विरोधियों की संभावनाओं पर चोट करना चाहते हैं।"

इसके लिए ज्योतिषाचार्य को अपने मोर्चे पर अलग रणनीति बनानी पड़ती है। वो एक ही लोकसभा क्षेत्र के दो नेताओं को सलाह नहीं देते। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें मदद देता हूं, जो सबसे पहले मेरे पास आते हैं और जिनके जीतने की संभावनाएं अच्छी होती हैं।"

AAP, वामपंथी दल के नेता नहीं लेते दिलचस्पी

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आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों के अलावा दूसरे सभी राजनीतिक दलों के नेता ज्योतिषाचार्यों की मदद ले रहे हैं। सोमायाजी ने कहा, "जम्मू कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता भी मेरे क्लाइंट हैं।"

वो उम्मीदवारों को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग तरह की पूजा करने की सलाह देते हैं। उन्होंने कहा, "चुनाव वाले दिन जनता पर असर छोड़ने के लिए विशेष पूजा की जाती है।"

उन्होंने बताया, "जरूरत और पूजा के तौर-तरीकों के आधार पर इसमें एक से लेकर आठ लाख रुपए तक का खर्च आता है। देश भर में अगर ज्योतिषाचार्यों के कारोबार की बात की जाए, तो यह हजारों करोड़ में होगा।"

अप्रैल में दो ग्रहण डालेंगे असर

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ज्योतिषचार्य पत्रिका के संपादक निरंजन बाबू ने कहा, "वो शुभ मुहूर्त को देखते हुए कई नामांकन दाखिल करते हैं। हम केवल उम्मीदवारों की कोशिशों में मदद देते हैं, ताकि उन्हें ईश्वर की मदद मिल सके।"

उन्होंने कहा, "कुछ नेता हमसे अपने चुनाव कार्यालय के लिए वास्तु पर भी सलाह-मशविरा मांगते हैं।" ज्योतिषाचार्य एस के जैन ने कहा कि अप्रैल में 15 दिन के भीतर दो ग्रहण लगने हैं और देश के सियासी भविष्य पर इसका असर होगा।

जैन ने कहा, "15 अप्रैल को चंद्रग्रहण है और 29 अप्रैल को सूर्यग्रहण। जिन पूजा की अब सलाह दी जाएगी, वो इन ग्रहण के उम्मीदवारों पर होने वाले असर से जुड़ी होंगी।"

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