मोदी और आप की लड़ाई में यहां फिर पिस ना जाएं राहुल!
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देश की सबसे पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पूर्वांचल की 12 लोकसभा सीटों पर अपना सुनहरा राजनीतिक दौर वापस पाने के लिए डेढ़ दशक से संघर्ष कर रही है।
यह हालत उस पार्टी की है जिसका कभी टिकट मिलना जीत की गारंटी माना जाता था।
अबकी 16वीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव में महंगाई और भ्रष्टाचार को लेकर आमजन नाराज हैं और इसके लिए अन्य दलों का निशाना भी कांग्रेस पर ही है।
लिहाजा यह देखना दिलचस्प होगा कि 2009 में पूर्वांचल में खाता भी न खोलने वाली कांग्रेस कितनी सीटें निकाल पाती है।
कांग्रेस ने '84 में पूर्वांचल में किया था क्लीन स्विप
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में देशभर में सहानुभूति की लहर थी। इससे पूर्वांचल भी अछूता नहीं रहा। तब इंदिरा गांधी के पुत्र राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने पूर्वांचल के 10 जनपदों की 12 लोकसभा सीटों पर क्लीन स्विप किया।
लेकिन बोफोर्स तोप सौदे में दलाली खाए जाने के आरोपों को लेकर राजीव गांधी मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य वीपी सिंह ने ऐसी मुहिम चलाई कि कांग्रेस की छवि मटियामेट हो गई।
वहीं, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर भाजपा का भी अभियान शुरू हो चुका था। इन दोनों मुद्दों की सरगर्मी के बीच नौवीं लोकसभा के लिए 1989 में हुए चुनाव में वीपी सिंह की पहल पर गठित जनता दल और भाजपा ने इधर की ज्यादातर सीटों पर कब्जा जमा लिया।
पिछले चुनाव में भी कांग्रेस का हो गया था सफाया
1989 में छह सीटें जनता दल, तीन भाजपा को मिलीं। कांग्रेस महज एक सीट पर सिमट कर रह गई। बसपा और निर्दल को भी एक-एक सीट हासिल हुई।
इसके बाद 1991 में भी कांग्रेस को एक ही सीट मिल सकी। लेकिन 1996, 1998 और 1999 में तो वह पूर्वांचल की 12 सीटों में खाता भी न खोल सकी। 2004 में वाराणसी सीट निकाल कर कांग्रेस ने किसी तरह से अपना सूखा खत्म किया। लेकिन 2009 का चुनाव कांग्रेस के लिए कड़वे अनुभव वाले साबित हुए और उसका फिर सफाया हो गया।
इस बार पूर्वांचल से मैदान में उतरे प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित बताने के लिए कई समीकरणों का हवाला देते फिर रहे हैं। परंतु नरेंद्र मोदी फैक्टर और सपा-बसपा के साथ ही आम आदमी पार्टी की मौजूदगी में कांग्रेसी समीकरण कितने सही साबित होंगे, इस ओर राजनीति के जानकार निगाहें गड़ाए हुए हैं।
पूर्वांचल से विजयी कांग्रेसी
2009..............कोई नहीं....................................
2004..............डा. राजेश मिश्र..................वाराणसी
1999..............कोई नहीं....................................
1998..............कोई नहीं....................................
1996..............कोई नहीं....................................
1991..............कल्पनाथ राय.........................घोसी
1989.............कल्पनाथ राय..........................घोसी