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मध्यप्रदेश में बीजेपी की बड़ी जीत
जयप्रकाश पाराशर
Updated Sat, 17 May 2014 01:43 AM IST
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मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी 29 में से 27 सीटें गई है। कांग्रेस को परंपरागत गढ़ वाली महज दो सीटें छिंदवाड़ा से कमलनाथ और गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया मिल रही हैं। सुषमा स्वराज ने चार लाख से भी ज्यादा अंतर से दिग्विज सिंह के भाई लक्ष्मणसिंह को विदिशा से हरा दिया है। सुमित्रा महाजन चुनाव में जीत का मार्जिन का रिकार्ड बनाने की तैयारी में है।
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छिंदवाड़ा में कांग्रेस के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने यह सीट बचाए रखने में सफल रहे हैं। उन्होंने बीजेपी के चौधरी चंद्रभान कुबेर सिंह को करीब 1 लाख 16 हजार मतों से हराया।
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इसी तरह गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपनी सीट बचाने में सफल रहे हैं। सिधिंया की जीत का अंतर करीब 1 लाख 12 हजार रहा। हालांकि इन दोनों ही नेताओं की जीत का अंतर पिछली बार की तुलना में कम रहा।
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भाजपा ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। यह 1984 में कांग्रेस की जीत के बाद किसी पार्टी की सबसे बड़ी जीत है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव खंडवा से, कांतिलाल भूरिया रतलाम-झाबुआ से और मंदसौर में मीनाक्षी नटराजन चुनाव हार गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष कटारे ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रदेशाध्यक्ष और वह स्वयं हार की जिम्मेदारी लेते हैं। भाजपा को इतनी जबर्दस्त सफलता मिली है कि कांग्रेस से एनवक्त पर आने वाले भागीरथ प्रसाद भिंड से और विधानसभा का चुनाव हार चुके अनूप मिश्रा मुरैना से चुनाव जीत रहे हैं।
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने विदिशा से लोकसभा चुनाव 4,10,698 मतों के भारी अंतर से जीत लिया है। दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मणसिंह को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। सुषमा स्वराज ने जहां भाजपा की जीत को 1977 से भी बड़ी जीत बताया है, वहीं लक्ष्मणसिंह का कहना है कि कांग्रेस को मैदान में ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है।
सुषमा स्वराज की इस जीत में नरेंद्र मोदी के कैंपेन का भी बड़ा योगदान रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो मध्य प्रदेश में सभी 29 सीटों पर जीत का लक्ष्य मिशन-29 लेकर चल रहे थे। लेकिन अंदरखाने में भाजपा के रणनीतिकार कम से कम 26 सीटें हर हाल में जीतने की योजना पर काम कर रहे थे, उस लिहाज से भाजपा के नेता 27 सीटों से संतुष्ट होंगे।
मध्य प्रदेश में भाजपा का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2004 में रहा था जब पार्टी ने 29 में से 25 सीटें हासिल की थीं। दिग्विजय सिंह के दस साल के शासन के खिलाफ उस समय एक जबर्दस्त लहर थी।
भाजपा अपनी जीत के लिए शिवराज सिंह चौहान के करिश्मे पर काफी ज्यादा निर्भर करती रही है लेकिन लोकसभा चुनावों के लिए नरेंद्र मोदी के समर्थक मतदाताओं में जबर्दस्त उत्साह था।
मुख्यमंत्री ने भी नर्मदा क्षिप्रा को जोड़ने और नीमच में सोलर प्लांट आरंभ करके चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था।
कहां गई आप
मध्य प्रदेश में कम से कम तीन सीटों मंदसौर, खंडवा और इंदौर में आम आदमी पार्टी ने काफी अच्छे उम्मीदवार उतारे थे लेकिन मोदी लहर के सामने इन सभी उम्मीदवारों की हालत खराब रही। हालांकि आम आदमी पार्टी ने सभी 29 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।