चुनावों में अब फर्जी वादे नहीं कर पाएंगे राजनीतिक दल!
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लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दल अब अनाप शनाप वादे नहीं कर पाएंगे। राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग के समक्ष न केवल अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों और घोषणाओं के पीछे तर्क रखने होंगे, बल्कि उन्हें यह भी समझाना होगा कि इन्हें पूरा करने के लिए वित्तीय जरूरत कहां से पूरी करेंगे। चुनाव आयोग ने सभी दलों को इस बारे में दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
आयोग ने अपने दिशा निर्देश में दलों से कहा है कि मतदाताओं का विश्वास केवल उन वादों पर हासिल किया जाना चाहिए, जिन्हें पूरा करना संभव है। ऐसे वादे नहीं किए जाएं जो कि माहौल को प्रभावित करने के साथ मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डाले।
नहीं तो तलब किए जाएंगे दल
आयोग के सूत्रों के अनुसार चुनाव घोषणा पत्र जारी होने के बाद अगर उसे किसी ने अतार्किक या मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डालने वाला बताया और इसकी शिकायत की, तो संबंधित दल को तलब किया जाएगा।
संबंधित राजनीतिक दल से पूछा जाएगा कि वह अपने संबंधित वादे को कैसे पूरा करेंगे। संबंधित दल को वादे का कारण ही नहीं बल्कि यह भी बताना होगा कि उस वादे को पूरा करने के लिए वह अपनी वित्तीय जरूरतों को कैसे हासिल करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल यह कह कर अनाप शनाप घोषणाओं पर रोक लगा दी थी कि ऐसे वादों और घोषणाओं से निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने की बुनियाद ही हिल जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भले ही ऐसी घोषणाओं और वादों को भ्रष्ट कार्यप्रणाली नहीं समझा जा सकता। लेकिन किसी भी तरह से मुफ्त उपहार बांटने से एक बड़े वर्ग पर प्रभाव तो पड़ता ही है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी कार्यप्रणाली पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग को व्यक्तिगत तौर पर पहल करने के निर्देश दिए थे।