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आठ साल, यूट्यूब बेमिसाल
भरत शर्मा
Updated Mon, 27 May 2013 08:13 AM IST
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बोलती-चलती तस्वीरें हमारी जिंदगी में कितनी गहराई तक रच-बस गई हैं, इससे हम सभी वाकिफ हैं। और वीडियो की इस दुनिया का हर जिक्र यूट्यूब के बिना अधूरा है।
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गंगनम स्टाइल को जन्म देने वाले दक्षिण कोरियाई साई हों या कोलावरी डी के जरिए घर-घर तक पहुंचे धनुष, यूट्यूब ही है जिसने उन्हें शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचा दिया।
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समूची दुनिया को वीडियो में समेटने वाले यूट्यूब ने नवंबर 2005 में आधिकारिक लॉन्चिंग से पहले मई 2005 में पब्लिक को यह साइट बीटा टेस्ट के लिए सौंपी थी।
इस लिहाज से देखें, तो इसे मैदान में उतरे आठ साल गुजर चुके हैं। इन आठ सालों में वीडियो शेयरिंग साइट ने इंटरनेट स्पेस का चेहरा कैसा बदला है, इसका उदाहरण करीब-करीब रोज हमें पता चलता है। यूट्यूब ने किसी मामूली क्रांति को जन्म नहीं दिया, बल्कि बड़े बदलावों की नींव रखी।
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इसने मुल्कों के बीच खिंची सरहदों को बेमानी बनाया, लोगों के नए-नए हुनर और अजीबोगरीब हरकतों को दुनिया को सामने रखा, समाज में बदलाव लाने में अहम किरदार निभाया और मनोरंजन का नया रास्ता खोला।
यहां तक कि लोगों ने अपने वीडियो इस पर अपलोड कर पैसा भी कमाना शुरू किया। दुनिया की कई बड़ी खबरों का आधार यूट्यूब के वीडियो बने हैं।
तीन नौजवानों का कमाल
एक मामूली वीडियो शेयरिंग वेबसाइट के तौर पर सफर की शुरुआत करने वाला यूट्यूब आज जहां भी पहुंचा, इसका श्रेय चैड हर्ले, स्टीव चेन और जावेद करीम को जाता है।
ये सभी इससे पहले पेपाल में काम करते थे। हर्ले ने पेनसिल्वीनिया की इंडियाना यूनिवर्सिटी से डिजाइन के गुर सीखे थे। चेन और करीम अर्बना कैम्पेन में यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय में साथ कंप्यूटर साइंस पढ़ते थे।
यूट्यूब वेंचर फंडेड टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप के तौर पर शुरुआत करने वाली इस नायाब वेबसाइट को नवंबर 2005 और अप्रैल 2006 के बीच सिकोइया कैपिटल से 1.15 करोड़ डॉलर का निवेश मिला था। बीटा टेस्ट शुरू होने से पहले यूट्यूब पर जो पहला वीडियो डाला गया, वह सैन डिएगो जू में खड़े फाउंडर जावेद करीम का है।
2005 में लॉन्चिंग के बाद से अपलोडेड कंटेंट और स्ट्रीमिंग को लेकर यूट्यूब लगातार नए-नए रिकॉर्ड बनाता
रहा है। मई 2011 में गूगल ने ऐलान किया था कि यूट्यूब हर मिनट 48 घंटे वीडियो अपलोड का जिम्मा
संभाल रहा था। जनवरी 2012 में यह बढ़कर 60 घंटे प्रति मिनट पर पहुंच गया।
अगर आज की बात करेंगे, तो यह 100 घंटे प्रति मिनट का आंकड़ा छू गया है। यानी हर सेकंड 1 घंटे और 36 मिनट के वीडियो इस पर अपलोड होते हैं। गूगल अब और वीडियो के लिए भी जोर लगा रहा है, इसलिए 53 सब्सक्रिप्शन चैनल लॉन्च किए गए हैं।
दुनिया ने माना लोहा
दुनिया में यूट्यूब के जरिए आए बदलावों को भी सराहा भी जा रहा है। हाल में कांस लॉयंस इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ क्रिएटिविटी ने कंपनी के सीईओ सालर कमंगर को मीडिया पर्सन ऑफ द ईयर के खिताब से नवाजा गया।
एडवरटाइजिंग जगत का यह ऑस्कर उन्हें दिया जाता है, जिनके इनोवेशन इंडस्ट्री को नए सिरे से आकार देने का दमखम रखते हैं। इससे पहले यह ट्विटर के जैक डोरसी, गूगल के एरिक श्मिट और फेसबुक के मार्क जकरबर्ग को मिल चुका है।
पुरस्कार स्वीकार करते वक्त कमंगर ने दुनिया के उन सभी कलाकारों और प्रोड्यूसर को धन्यवाद दिया, जिन्होंने यूट्यूब को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाया है।
यूट्यूब ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसे यूजर्स ने इन ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और आगे भी कामयाब रहने के लिए उसे इन्हीं यूजर्स की जरूरत होगी। और कंपनी यह बात भली-भांति जानती है।
हाल में आठवें जन्मदिन के मौके पर यूट्यूब ने अपने ब्लॉग पर लिखा, 'यूट्यूब को खास बनाने के लिए शुक्रिया। हमें यह बताने का शुक्रिया कि किस तरह वीडियो रिश्ते बनाते हैं, सरहदें लांघते हैं और अंतर पैदा करते हैं। आपको नहीं पता होता कि वीडियो लिंक क्लिक करने पर क्या निकलेगा, लेकिन फिर भी आपने हम पर भरोसा किया।'
यूट्यूब की राह नहीं आसान
ऐसा नहीं कि यूट्यूब की राह आसान है। इंटरनेट की दुनिया हर दिन बदल रही है। वीमियो, मेटाकैफे, फ्लिकर और डेलीमोशन जैसी दूसरी वीडियो शेयरिंग वेबसाइट भी मैदान में हैं।
ऐसे में यूट्यूब को नियमित अंतराल पर कुछ नया लाना होगा। चुनौतियां आती रहेंगी और उनसे पार भी पाना होगा। वीडियो पर आठ साल पहले शुरू हुआ दुनिया का सफर जारी है।