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देश की सबसे लंबी सुरंग, अनूठा है 8 साल का सफरनामा

Wed, 26 Jun 2013 09:25 PM IST
श्रीनगर/ब्यूरो
श्रीनगर/ब्यूरो Updated Wed, 26 Jun 2013 09:25 PM IST
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eight years journey of india's longest train tunnel

जम्मू और कश्मीर के इलाकों को रेल मार्ग से जोड़ने वाली सुरंग कई मायनों में अनूठी है।

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वर्ष 2005 में जब पीर पंजाल रेंज को चीरकर करीब 11 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने का काम शुरू हुआ, तो बहुत कम लोगों को इसकी कामयाबी की उम्मीद थी।

सबसे बड़ी चुनौती दहशत के माहौल और भारी बर्फबारी के बीच इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य को पूरा करने की रही।

भारी-भरकम मशीनों को 5 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचना और जमीन के डेढ़ किलोमीटर भीतर तक सुरंग खोदना किसी अजूबे को अंजाम देने की तरह लगता है। लेकिन, चुनौतियों के पहाड़ से निकली यह सुरंग कई मायनों में अनूठी है।

पीर पंजाल सुरंग का निर्माण कार्य करने वाली हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर यलाल बताते हैं कि इस रेल सुरंग से मोटर वाहनों के गुजरने के खास इंतजाम भी किए गए हैं। इसके लिए पटरी के पास 3 मीटर जगह छोड़ी गई है।
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यह देश की अनूठी रेल सुरंग है, जिससे होकर मोटर वाहन भी निकल सकते हैं। आपात स्थिति में मोटर वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए सुरंग में रेल की पटरियों को पत्थर के ऊपर स्लीपरों पर रखने के बजाय कंक्रीट के अंदर गाड़ा गया है। इससे पटरियों के ऊपर भी बस या ट्रक चल सकते हैं।
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पहले दिन से इस प्रोजेक्ट से जुड़े यलाल का कहना है कि प्रतिकूल मौसम और माहौल के अलावा कुशल मजदूरों के मिलने में बड़ी दिक्कत आई। इसके अलावा पीर पंजाल के भूगोल से पार पाना भी मुश्किल था। इसलिए खुदाई के लिए खास ऑस्ट्रियाई तकनीक अपनाई गई, जिसमें चट्टानों की संरचना के हिसाब से खुदाई के तरीके अपनाए जाते हैं।

लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती तब खड़ी हुई जब विदेशों से मंगाई गई दो बड़ी मशीनें खुदाई के लिए कारगर साबित नहीं रही। इन सब मुश्किलों के चलते पांच साल और 400 करोड़ रुपये में बनने वाली सुरंग सात साल और 800 करोड़ रुपये में बनी।

हर सेकेंड 200 लीटर पानी का बोझ
कश्मीर जैसे बर्फबारी वाले इलाके में चट्टानों से रिसने वाला पानी सुरंग के लिए सबसे बड़ा खतरा है। पीर पंजाल सुरंग में हर सेकेंड करीब 200 लीटर पानी पहुंचता है। इससे निपटने के लिए सुरंग की दीवारों को इटली से आई खास झिल्ली से ढका गया है, जिससे पानी टपकने के बजाय नालियों से बाहर निकलता है।


350 टन विस्फोटक का इस्तेमाल
पीर पंजाल की चट्टानों को भेदकर सुरंग करीब 11 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने में करीब 350 टन डायनामाइट जैसे विस्फोटकों का इस्तेमाल हुआ है। निर्माण से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि पीर पंजाल को जितना कठोर माना जा रहा था, खुदाई में उससे कहीं ज्यादा कठोर निकला।

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