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‘इंजीनियर नहीं 10वीं फेल हैं महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री’

Thu, 09 Jul 2015 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,मुंबई
ब्यूरो/अमर उजाला,मुंबई Updated Thu, 09 Jul 2015 11:40 PM IST
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education minister of maha is high school fail

फर्जी डिग्री विवाद में घिरे महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े की डिग्री को लेकर एनसीपी ने एक नया खुलासा किया है। इसके मुताबिक वह 10वीं पास भी नहीं हैं।

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तावड़े बीई इलेक्ट्रॉनिक (इंजीनियर) होने का दावा करते हैं, लेकिन एनसीपी का कहना है कि उन्होंने 10वीं की परीक्षा भी नहीं दी है।एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए और तावड़े को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
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मलिक ने दावा किया है कि विनोद तावडे़ 10वीं की परीक्षा में भी नहीं बैठे। उनकी जगह डमी छात्र ने 10वीं की परीक्षा दी थी और जिसने उनके स्थान पर परीक्षा दी, तावड़े उसको जानते हैं।

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यहां भी हो सकता है व्यापमं जैसा घोटाला!

education minister of maha is high school fail

एनसीपी प्रवक्ता ने कहा कि जो डमी छात्र के दम पर उच्च शिक्षित होने की बात करता है और फर्जी डिग्री बांटने वाली संस्था से इंजीनियर होने का दावा करता हो। उसके मंत्री रहते राज्य की शिक्षा का बंटाधार होना तय है।

उन्होंने आशंका जताई कि तावड़े के शिक्षा मंत्री रहते महाराष्ट्र में मध्य प्रदेश के व्यापम जैसे गड़बड़ घोटाले हो सकते हैं। मलिक ने कहा कि  एमपी के व्यापम की तर्ज पर महाराष्ट्र में मेडिकल और इंजीनियरिंग के लिए सीईटी की परीक्षा होती है।

ऐसे में जिसने फर्जी तरीके से शिक्षा प्राप्त की हो और उसी फर्जीगिरी से राजनीति में आया हो, वह शिक्षामंत्री बना रहेगा तो महाराष्ट्र में भी व्यापम की तरह स्थिति भयंकर हो सकती है।

संस्थान की नहीं थी मान्यता

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मलिक ने कहा कि उन्होंने जिस ज्ञानेश्वर विद्यापीठ में बीई इलेक्ट्रॉनिक में एडमिशन लिया था, वह विद्यापीठ 12वीं फेल बच्चों को इंजीनियर बनाने का सपना दिखाकर विज्ञापन देती थी। जबकि इस संस्थान को विश्वविद्यालय की मान्यता ही नहीं थी।

वह फर्जी डिग्री बांटती थी। उन्होंने कहा कि 2004 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में उच्च तकनीक शिक्षा मंत्री थे, तब यह मामला संज्ञान में आया था। उसके बाद उन्होंने ज्ञानेश्वर विद्यापीठ सहित राज्य में चल रहे फर्जी शिक्षण संस्थानों की जांच का आदेश दिया था।

2005 में जांच रिपोर्ट आई। उसके बाद बांबे हाईकोर्ट के आदेश पर इस विद्यापीठ में इंजीनियर बनाने का फर्जी धंधा बंद हो गया।

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