चुनावों तक नहीं भेज पाएंगे बल्क SMS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगामी लोकसभा चुनाव में मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए गलत तरीके अपनाए जाने लगाम कसने के लिए चुनाव आयोग ने टेलीकॉम से थोक में सिम कार्डों की खरीद (बल्क बाइंग) पर नजर रखने को कहा है। कंपनियों से खासतौर पर प्री पेड कार्डों को लेकर सतर्कता बरतने को कहा है।
आयोग ने चुनाव प्रचार के लिए बल्क एसएमएस भेजे जाने की संभावनाओं को देखते हुए कंपनियों को यह निर्देश दिया है। चुनाव आयोग की ओर से एयरटेल, एमटीएनएल, रिलायंस, वोडाफोन, आइडिया व अन्य मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों इस बारे में पत्र भेजा गया है।
चुनाव खर्च छुपाने के फंडे
दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी विजय देव द्वारा भेजे गए इस पत्र में कंपनियों से नया मोबाइल कनेक्शन जारी करने से पहले आवेदक का पूरी तरह वेरिफिकेशन जरूर कर लें। इसके साथ ही कनेक्शन जारी करने के लिए जरूरी सारी प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाए।
इस बारे में जानकारी देते हुए विजय देव ने कहा कि कई बार चुनाव खर्च छुपाने के लिए कुछ प्रत्याशी बिना पहचान वाले (अननेम्ड) सिम कार्ड का इस्तेमाल करके बल्क एसएमएस भेजते हैं। इसके अलावा ऐसे सिम कार्डों के जरिए इंटरनेट व सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके भी चुनाव प्रचार किया जाता है।
इस तरह से यह खर्च उनके चुनाव खर्च में नहीं जोड़े जा पाते हैं। इसी को देखते हुए हमने मोबाइल ऑपरेटरों को सिम कार्डों की बल्क खरीद और खासकर प्री पेड कार्ड जारी करने को लेकर सतर्कता बरतने को कहा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले मुख्य चुनाव अधिकारी ने टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ बैठक की थी, जिसके बाद यह निर्देश जारी किया गया है।
असामान्य बिक्री की मांगी जानकारी
देव ने बताया कि टेलीकॉम कंपनियों से कहा गया है किसी भी इलाके में सिम कार्डों की ‘असामान्य बिक्री’ होने पर इसकी सूचना चुनाव आयोग को उपलब्ध कराई जाए, ताकि चुनाव आयोग इसपर नजर रख सके।
कंपनियों से ऐसे मामलों में वेंडर का नाम और उसके द्वारा बेचे गए सिमकार्डों की संख्या आयोग को बताने को कहा गया है। देव ने बताया कि कंपनियों को 8 अप्रैल को शाम पांच बजे से 10 अप्रैल शाम पांच बजे तक बल्क एसएमएस पर रोक लगाने को भी कहा गया है। यह निर्देश दिल्ली में 10 अप्रैल को मतदान को देखते हुए दिया गया है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग टेलीकॉम कंपनियों को उनके कनेक्शन के जरिए भेजे जाने वाले बल्क एसएसएस की रिपोर्ट प्रतिदिन उपलब्ध कराने का निर्देश दे चुका है।