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असहिष्णुता को लेकर अमेरिका ने दी मोदी को नसीहत

Thu, 05 Nov 2015 11:26 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/वाशिंगटन Updated Thu, 05 Nov 2015 11:26 AM IST
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echo of intolerance Is resonating in us

भारत में बढ़ती असहिष्णुता की गूंज दूसरे देशों में भी सुनाई देने लगी है। मूडी कारपोरेशन के बाद अब न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नसीहत देने के अंदाज में लिखा है कि भारत में बढ़ते असहिष्णुता के माहौल से देश और विदेश के बिजनेस लीडर निराश हैं।

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सच्चाई यह है कि भारत में नफरत की वजह से दरार आ गई है और यह कुछ हिंदू अतिवादियों की असहनशील मांगों के कब्जे में है। अखबार का यह लेख मोदी के उस अमेरिकी सपने को झटके जैसा है, जो उन्होंने कुछ दिनों पहले सिलिकॉन वैली में देखा था।
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अखबार ने यह संपादकीय हिंदू अतिवाद की कीमत नाम से लिखा है। इसके अनुसार यह वह भारत नहीं है, जैसा बड़ी संख्या में भारतीय चाहते हैं। यह वह भारत भी नहीं है, जो विदेशी निवेश आकर्षित कर सके, जिसके लिए मोदी ने अपनी विदेश यात्राओं में मेहनत की है।

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मूडी ने भी दी थी नसीहत

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पिछले हफ्ते मूडी ने भी मोदी को चेताया था कि राजनीतिक विफलता आर्थिक परिणामों के लिए घातक हो सकती है। संस्था ने अपनी रिपोर्ट में प्रधानमंत्री को विवादित बयान देने वाले भाजपा नेताओं पर लगाम लगाने की नसीहत दी थी।

मूडी के मुताबिक ऐसा नहीं करने पर मोदी के घरेलू और वैश्विक मोर्चे पर अपनी विश्वसनीयता खो देने का खतरा है।

प्रधानमंत्री मोदी अमूमन मीडिया की आलोचना को खास तवज्जो नहीं देते लेकिन उनकी हाल की अमेरिकी यात्रा ने दोनों देशों में बहुत उम्मीदें जगा दी हैं। ऐसे में वहीं के एक अखबार द्वारा भारत की स्थिति पर की गई टिप्पणी के काफी मायने हैं।

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