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चुनाव आयोग के दो झटकेः पहला कांग्रेस, दूसरा मोदी को!

Sat, 03 May 2014 01:41 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 03 May 2014 01:41 PM IST
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ec may allow snoopgate investigation but not apoointing next army chief

चुनाव आयोग हरकत में आ गया है। वो केंद्र सरकार को अगले सेना प्रमुख नियुक्त करने का फैसला लोकसभा चुनावों तक टालने के लिए कह सकता है, क्योंकि उसके मुताबिक सरकार इस मामले में जो जल्दबाजी दिखा रही है, समझ से परे है।

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हालांकि, वो 16 मई को आने वाले लोकसभा चुनावों के नतीजे आने से पहले केंद्र सरकार के गुजरात में स्पूनगेट की जांच कराने की राह में शायद अवरोध पैदा नहीं करेगा। इस मामले में भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी पर उंगलियां उठ रही हैं।
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नहीं रुकेगी गुजरात स्नूपगेट की जांच?

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केंद्र ने इस सप्ताह की शुरुआत में अगले सैन्य प्रमुख पर चुनाव आयोग से संपर्क साधा था, लेकिन स्नूपगेट जांच पैनल को लेकर अधिसूचना पर कोई औपचारिक मंजूरी नहीं मांगी गई, क्योंकि इस बारे में कैबिनेट का फैसला चुनावों के ऐलान से पहले आया था।

हालांकि, चुनाव आयोग का आदेश अगले सैन्य प्रमुख की नियुक्ति पर होने वाले निर्णय के आड़े आ सकता है। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक वो इस बारे में फैसला टालने की सलाह देगा।

सैन्य प्रमुख नियुक्त करने पर रोक?

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दरअसल, उसका मानना है कि जनरल बिक्रम सिंह का उत्तराधिकारी खोजने को लेकर सरकार की तरफ से जो जरूरत और जल्दबाजी दिखाई जा रही है, वो सही नहीं है, क्योंकि उन्हें तीन महीने बाद 31 जुलाई को रिटायर होना है।

आम तौर पर यह परंपरा है कि सैन्य प्रमुख की रिटायरमेंट से दो महीने पहले नए प्रमुख का ऐलान किया जाता है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक इस फैसले के लिए दो हफ्ते रुका जा सकता है, जब तक चुनाव आदर्श आचार संहिता भी हट जाएगी।

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'सरकार की जल्दबाजी समझ से परे'

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आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक अहम नियुक्ति को लेकर सरकार जो सक्रियता दिखा रही है, वो गैर-जरूरी है और इस बारे में बाद में फैसला हो सकता है।

इस बारे में शुक्रवार को हुई चुनाव आयोग की बैठक में मन बना लिया गया है और जल्द ही रक्षा मंत्रालय को इसकी जानकारी दी जा सकती है। जाहिर है, ऐसा हुआ, तो नए सैन्य प्रमुख के नाम का ऐलान नई सरकार करेगी।

हालांक‌ि, सेना में जनरल बिक्रम सिंह के उत्तराधिकारी को चुनने के मामले में कुछ खास असर भी पड़ सकता है। यूं तो सैन्य वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग वरिष्ठता के आधार पर रेस में सबसे आगे हैं और उन्हें यह मौका मिल सकता है।

कौन बनेगा जनरल बिक्रम का उत्तराधिकारी?

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लेकिन ऐसे भी कयास हैं कि अगर 16 मई के बाद केंद्र की सरकार बदलती है और उसकी अगुवाई भाजपानीत एनडीए को मिलती है, तो नियुक्ति के मामले में वरिष्ठता को साइड रखा जा सकता है।

बिक्रम-सुहाग के मामले में पूर्व सैन्य प्रमुख और अब भाजपा नेता जनरल वी के सिंह का विरोध जगजाहिर रहा है।

इत्तफाक की बात है कि फिलहाल साउदर्न आर्मी कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक सिंह के बेटे की शादी जनरल ‌वी के सिंह की बेटी से हुई है और वो लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं।
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