चुनाव आयोग ने केजरीवाल को चेताया
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चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान मुस्लिम मतदाताओं को आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोट करने की अपील वाले पर्चे बांटने के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के तर्कों को खारिज कर दिया है।
आयोग का कहना है कि ऐसे पर्चे वितरित करना आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के बराबर है। आयोग ने उन्हें चेताते हुए कहा कि वह भविष्य में चुनाव प्रचार के दौरान सावधानी बरतें।
चुनाव आयोग ने केजरीवाल को दिए अपने आदेश में कहा कि आयोग ने मामले के तथ्यों, हालातों तथा उनके द्वारा पेश किए गए तर्कों पर विचार किया है।
इन सभी पर गौर करने के बाद आयोग इस पर अपनी चिंता प्रकट करता है और साथ ही उनको आगाह करता है कि भविष्य में वह अपनी पार्टी के चुनाव अभियान में अधिक सावधानी बरतें।
आचार संहिता उल्लंघन का मामला
आयोग ने माना है कि केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी पार्टी के पक्ष में एक खास धार्मिक समुदाय के वोट हासिल करने के लिए पर्चे में अपील की थी, जोकि आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।
चुनाव संपन्न कराने वाली संस्था का कहना है कि वह केजरीवाल द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पर्चें में जो भाषा इस्तेमाल की गई है उसे संपूर्णता में पढ़ा जाना चाहिए और यह दावा किया था कि वह सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे।
पर्चों की भाषा पर आपत्ति
चुनाव आयोग ने केजरीवाल को 20 नवंबर को इस मामले में नोटिस जारी किया था। यह नोटिस दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना के बेटे हरीश खुराना की शिकायत पर जारी किया गया था।
हरीश ने मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए बांटे गए पर्चों की भाषा पर आपत्ति जताई थी। केजरीवाल ने अपने पर्चे में मुस्लिमों वोटरों से आप के पक्ष में वोट देने की अपील की थी।
साथ ही उन्होंने अपने पर्चे में भाजपा को सांप्रदायिक पार्टी करार देते हुए कहा था कि मुस्लिमों के पास अब तक कोई विकल्प नहीं था लेकिन अब उनके पास आप जैसा ईमानदार विकल्प है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी लगाई थी फटकार
इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्रीपद पर होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन करने वाले अरविंद केजरीवाल की भूमिका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के परीक्षण के दायरे में आ गई।
सर्वोच्च अदालत ने धारा-144 लागू होने के बावजूद राजधानी के बीचो-बीच केजरी समर्थकों के गैरकानूनी जमावड़े को अनुमति देने और कदम न उठाने को लेकर दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लिया है।
साथ ही केंद्र और दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाब तलब किया है।
जस्टिस आरएम लोढा और जस्टिस शिव कीर्ति सिंह की पीठ ने निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लोगों को रेल भवन के बाहर एकत्र होने की छूट देने को लेकर दिल्ली पुलिस के लचर रवैये की कड़ी आलोचना की।