इबोला फाइटर्स ने जीती टाईम 'पर्सन ऑफ द इयर' की दौड़
टाइम पर्सन ऑफ द इयर की सालाना प्रतियोगिता में भी "इबोला'' के आगे सब पस्त हो गए। दक्षिणी अफ्रीकी देशों में महामारी का रूप लेता जा रहा इबोला कई लोगों की जान ले चुका है जबकि कुछ अब भी इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। टाइम पर्सन ऑफ द इयर की इस दौड़ में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थी, लेकिन वो पर्सन ऑफ द इयर की निर्णायक दौड़ में शामिल होने वाले अंतिम आठ लोगों में जगह नहीं बना पाए। हालांकि उन्हें जनता का भरपूर वोट मिला।
पर्सन ऑफ द इयर की दौड़ में जिन लोगों का अंतिम आठ में चयन किया गया था वो लोग भी अपने अपने क्षेत्र में अपने अद्भुत काम के लिए जाने जाते हैं। इबोला ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरते हुए इस बार टाइम के पर्सन ऑफ द इयर की दौड़ में बाजी मारी है। ज्ञात आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम अफ्रीकी देशों में इबोला के चलते अब तक 7000 लोगों की जान जा चुकी है।
कई देशों में इबोला की महामारी के खतरे को देखते हुए हवाई अड्डों पर अलर्ट भी जारी किया जा चुका है। इबोला एक ऐसी असाध्य बीमारी है जिसमें बचने की संभावना न के बराबर होती है। यह रोग रोगी के संपर्क में आने से, उसके पसीने से या उसके खून या लार के संपर्क में आने से भी फैल सकता है। हालांकि इबोला का टीका अभी तक विकसित नहीं किया जा सका है लेकिन कुठ देश इसके लिए प्रयासरत हैं।
रनर-अप बने ब्लादमिर पुतिन
जानकारी के मुताबिक टाइम्स पर्सन ऑफ द इयर की इस दौड़ में रूस के राष्ट्रपति ब्लादमिर पुतिन दूसरे नंबर पर रहे हैं उनके रनरअप बनकर संतोष करना पड़ा है।
टाइम पर्सन ऑफ द इयर की निर्णायक दौड़ के लिए करीब आठ लोगों का चयन किया गया था। इन्हीं में से किसी एक को इस साल का टाइम पर्सन ऑफ द ईयर चुना जाना था।
अंतिम आठ में शामिल लोगों के नाम हैं, जैक मा (अलीबाबा के प्रमुख), इबोला नर्सिंग स्टाफ, व्लादिमीर पुतिन (रूसी राष्ट्रपति), टिम कुक (एपल सीईओ), फर्ग्युसन के प्रदर्शनकारी, टेलर स्विफ्ट (गायिका), रॉजर गुडेल (एनएफएल कमिश्नर) और मसूद बरजानी (कुर्दिश नेता)।