फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   easier to adopt a child in India

बच्चा गोद लेना हुआ आसान, सरकार का बड़ा फैसला

Mon, 19 Oct 2015 08:46 AM IST
Updated Mon, 19 Oct 2015 08:46 AM IST
विज्ञापन
easier to adopt a child in India

बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए केंद्र सरकार ने अब इसके लिए पुलिस सहमति प्रमाणपत्र की बाध्यता को खत्म कर दिया है।

विज्ञापन


महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश में गोद लेने की प्रक्रिया सरल बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रक्रिया में बदलाव पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये को देखते हुए भी लिया गया है।

हालांकि विदेश से भारत आकर बच्चा गोद लेने वालों के लिए पुलिस की पड़ताल अनिवार्य ही रहेगी।मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घरेलू स्तर पर इससे जुड़ी शिकायतों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी।
विज्ञापन


यही वजह है कि पुलिस वेरिफिकेशन की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। मंत्रालय ने हाल ही में गोद लेने से पहले गैर सरकारी संगठनों के जरिए किए जाने वाले होम स्टडी रिपोर्ट (आवास अध्ययन रिपोर्ट) के नए फॉर्मेट को जारी किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार ने खत्म की पुलिस की भूमिका

easier to adopt a child in India

इसके आधार पर ही कोई गोद लिए बच्चे का कानूनी रूप से अभिभावक बन सकता है। अधिकारी ने कहा कि इस फॉर्मेट में नए बदलाव कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से अभिभावक के आपराधिक रिकॉर्ड की छानबीन नहीं की जाती है।

ऐसे में पुलिस के पड़ताल की जरूरत का कोई मतलब नहीं है। ऐसी कई शिकायतें भी आई हैं जिनमें पुलिस की वजह से गोद लेने की प्रक्रिया महीनों तक अधर में अटकी रही। सरकार की मंशा गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, न कि भावी अभिभावकों को जटिल प्रक्रिया से गुजारना। उन्होंने इस प्रक्रिया को समझने में पुलिस की असमर्थता को भी उजागर किया।

अधिकारी ने कहा कि ज्यादातर अभिभावक जो बच्चा गोद लेना चाहते हैं उनके पास पैन कार्ड, पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, ऐसे में अपराधी की तरह उनकी जांच करने की जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पुराने फॉर्मेट में गोद लेने वाले अभिभावकों के नजदीकियों के लिखित संदर्भ लेने का प्रावधान है लेकिन ज्यादातर एनजीओ अभिभावक के घर का मुआयना करते हुए पड़ोसी, परिवार के दूसरे सदस्यों से नहीं मिलते हैं। इसलिए नए फार्म में एनजीओ की जिम्मेदारी बढ़ाते हुए उन्हें इस बाबत विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य किया गया है।

घरेलू स्तर पर गोद लेने के लिए दस्तावेज की जरूरत
बाल अध्ययन रिपोर्ट जिस पर अभिभावक के हस्ताक्षर और बच्चे की फोटो लगी हो। बच्चे का मेडिकल जांच, बाल कल्याण समिति का प्रमाणपत्र, आवास अध्ययन रिपोर्ट के साथ उनकी फोटो, दो बाहरी लोगों के प्रमाण, पैन कार्ड, आवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, विवाह या तलाक का प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र, अधिकृत एजेंसी का सर्टिफिकेट का होना जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed