कुदरत का करिश्मा! 120 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकला ये शख्स
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इसे उसकी जिजीविषा और कुदरत का करिश्मा दोनों कह सकते हैं, लेकिन पेम्वा लामा की चलती सांसें राहत एवं बचाव कर्मियों को भी हैरान कर देने वाली रही। पेम्वा ने घी और फर्श पर पोछा लगाने वाले पानी को पीकर खुद को जीवित रखने की कोशिश की और आखिरकार भूकंप की तबाही के करीब 120 घंटे बाद उसे दूसरा जीवन मिल ही गया।
18 वर्षीय पेम्वा लामा गोगवु स्थित सात मंजिला गेस्ट हाउस में बर्तन धोने का काम करता था । उसकी मां तीन साल पहले ही कुवैत चली गई थी। इसके बाद वह काम खोजते हुए काठमांडू आया था। शनिवार को भूकंप आने के दौरान वह गेस्ट हाउस के एक कोने में फंस गया।
जब भूकंप से गेस्ट हाउस हिलने लगा तो वहां अफरा-तफरी मच गई और देखते-देखते वह इमारत भरभराकर गिर गई। इस हादसे में पेम्वा भी मलबे के भीतर दब गया, लेकिन कोने में होने के कारण उसे मलबे के नीचे पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही थी।
मलबे से बाहर निकलते ही किया मां को याद
उसके अगल-बगल तमाम लोगों के शव थे और उसे उम्मीद नहीं थी कि वह जीवित बाहर निकल पाएगा, लेकिन बृहस्पतिवार को नेपाली समय के अनुसार सुबह 11 बजकर 56 मिनट पर नेपाल के आर्म्ड फोर्स, फ्रांस और अमेरिकी की टीम ने पेम्वा लामा को मलबे से जीवित बाहर निकाला। टीम के सदस्यों के मुताबिक प्रशिक्षित कुत्ते ने मलबे के नीचे पेम्वा के होने का संकेत दिया और खुदाई करके उसे बचाने में सफलता मिली।
मां को किया याद
पेम्वा की मां तो नेपाल में नहीं है लेकिन कहते हैं हर इंसान हमेशा उसके करीब होता है। पेम्वा के साथ भी यही हुआ। जैसे ही वह मलबे से बाहर आया, बार-बार अपनी मां को पुकार रहा था।
‘मुझे कभी लगता था कि जिंदा हूं और कभी लगता था कि मर गया। जब-जब होश आता तो खूब चिल्लाता था। मुझे लगता था कि शायद कोई मेरी आवाज सुन ले और मैं बच जाऊं, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था। थोड़ी देर बचाने के लिए गुहार लगाने के बाद मेरी आवाज गुम हो जाती थी। इस दौरान मैंने पोछा लगाने वाला पानी और घी पीकर खुद को जीवित रखा।’- पेम्वा लामा