'ऐसा भूकंप आया, जिसे मैं ताउम्र नहीं भुला पाऊंगी'
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बीते दो सालों से जब से मैं नेपाल में रह रही हूं, मगर मैने सोचा भी नहीं था कि यहां भूकंप भी आ सकता है। मेरी सारी धारणाएं गलत साबित हुईं, भूकंप ऐसा आया कि जिसे मैं ताउम्र नहीं भुला पाऊंगी। ये सोचकर हैरान और खौफजदा हूं कि शनिवार और रविवार को आए भीषण भूकंप के बाद भी जिंदा कैसे हूं।
मेरे नेपाली दोस्त अक्सर कहते हैं कि कुछ चीजों पर आपका बस नहीं होता, सबकुछ कर्म से निर्धारित होता है। मेरी किस्मत में जिंदगी लिखी थी, इसलिए मैं इन भयावह पलों की गवाह बन गई। बौद्ध मठों और हिंदू मंदिरों के लिए जाने-जाने वाले काठमांडू का एक जिंदादिल इतिहास और संस्कृति है।
मगर 40 सेकेंड में ही इस शहर में मलबों का ढेर लग गया। मगर मुझे मालूम है यह शहर भले ही कुछ देर के लिए ठहर सा जाए, मगर जिंदगी यहां फिर उसी जिंदादिली के साथ धड़केगी। शनिवार को जैसे ही पहला झटका आया, उस वक्त मैं और मेरा दस साल का बेटा लुकास सांस्कृतिक विरासत के लिए मशहूर पाटन में पिज्जा लेने के लिए जा रहे थे।
40 सेकेंड में ही काठमांडू में लगा मलबों का ढेर
मुझे ऐसा झटका लगा कि जैसे मेरी कार का टायर फट गया हो या फिर किसी मोटरसाइकिल ने पीछे से टक्कर मार दी हो। कार मेरे काबू से बाहर हो गई और बीच सड़क पर लहराने लगी। उसी वक्त मैंने देखा कि लोग बदहवास से भाग रहे हैं। कुछ महिलाएं सड़क पर भगी जा रही थीं। रास्ते में एक मोटरसाइकिल सवार गिरा पड़ा था।
मैंने सड़क के बीचोंबीच कार रोकी और उसका इंजन बंद किया। मुझे बस यही सूझा कि अपने बेटे को किसी तरह सुरक्षित बाहर निकालूं। मैंने उसे बाहर निकालकर उसके सिर को अपने हाथों से किसी तरह ढक लिया। हालांकि उस वक्त मेरे दोनों हाथ बुरी तरह कांप रहे थे।
बाद में किसी तरह कार चलाकर घर पहुंची। हर ओर सड़क पर घरों और दुकानों के मलबे बिखरे पड़े थे। मेरे पति उस वक्त बिजनेस ट्रिप पर कहीं बाहर गए हुए थे। घर में हमारा प्यार कुत्ता रोडेशियन रिगबैक गेट पर बेचैनी से हमारा इंतजार कर रहा था।
शायद उसे भी तब तक इस भयावहता का अंदाजा हो गया था। वह भी बुरी तरह सहमा हुआ था। मैं तेजी से घर के अंदर दाखिल हुई और जैसे ही अपना पासपोर्ट लेने के लिए सीढ़ियों पर पहुंची ही थी कि एक और झटके ने मुझे सीढ़ियों से नीचे फेंक दिया। लुकास और मैं तेजी से घर से बाहर आए और एक गांव की ओर भागे।
इंसान तो क्या पशु-पक्षी भी सहमे हुए नजर आए
रास्ते में हमने देखा कि राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। मलबों से लोगों को निकाला जा रहा था। चीख-पुकार मची हुई थी। हम जिस गांव में पहुंचे वहां काठमांडू का सबसे पुराना जातीय समुदाय नेवार रहता है। हमने वहीं एक टेंट में दहशत के बीच रात गुजारी।
कुछ लोग तो खुले आसमान के नीचे सोते नजर आए। सबकी आंखों में दहशत साफ दिखाई दे रहा था। मैं खुद भी डरी हुई थी। सभी को यह खौफ था कि कहीं फिर कोई भूकंप न आ जाए। हमारी आशंका अगले ही दिन सच साबित हुई, जब नेपाल को एक बार फिर इस भीषण भूकंप ने रह-रहकर दस्तक दी।
इंसान तो क्या पशु-पक्षी भी सहमे हुए दिखाई दे रहे थे। यहां तक कि हमारा कुत्ता भी हमारा साथ छोड़कर खेलने का तैयार नहीं था। वह हमारे आस-पास ही चुपचाप दुबका रहा।
इसी वजह से मैं नेपाल को बेहद प्यार करती हूं
मैंने देखा कि एक पड़ोसी दूसरे की मदद कर रहा था। कोई खाना पूछ रहा था तो कोई पानी। यहां तक कि अपने परिजनों के बिछड़ने की परवाह न करते हुए भी लोग दूसरों के हाल-चाल के लिए परेशान दिखे और मदद के लिए तैयार दिखे।
हर जगह उनकी दरियादिली देखने को मिली। इसी वजह से मैं नेपाल को बेहद प्यार करती हूं। मदद का आलम यह रहा कि लोगों को फौरी राहत पहुंचाने के लिए कुछ समय के लिए अपनी दुकानें तक खोल दीं।
काठमांडू में पसरा सन्नाटा
कभी पर्यटकों से गुलजार रहने वाली नेपाल की राजधानी काठमांडू में भूकंप के बाद वीरानी सी छा गई है। रविवार को हर ओर सन्नाटा पसरा पड़ा नजर आया। दुकानें और बाजार बंद हैं तो गलियों और चौराहों पर आवारा कुत्ते टहलते हुए नजर आ रहे हैं।
सड़कों पर या तो केवल राहत एवं बचावकर्मी नजर आ रहे हैं या फिर सुरक्षा बलों के वाहन दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। रह-रहकर सड़कें फिर खामोश हो जाती हैं। राजधानी के कई पर्यटन स्थल तो अब अतीत का हिस्सा बन चुके हैं। और जो बचे हैं, वे भी पर्यटकों के न आने से सूने पड़े हैं। हालत यह है कि शहर एक बडे़ शिविर में तब्दील हो चुका है।
किस्मत अच्छी थी कि दिन में आया भूकंप
हम लोग उन अच्छी किस्मत वाले लोगों में से थे, जो जिंदा बच गए थे। अच्छी किस्मत इस मायने में थी कि भूकंप रात को नहीं, बल्कि दिन में आया। किस्मत इसलिए भी कि यह त्रासदी जाड़ों या फिर बरसात में नहीं घटी। वरना यह त्रासदी और भी भयावह हो सकती थी।
नेपाल को भारी मदद देगा संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र संघ ने रविवार को नेपाल को उसे बड़ी मदद देने का ऐलान किया है। मानवीय राहत सहायता पहुंचने का भरोसा दिलाते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने नेपाल से कहा है वह उसे राहत और बचाव अभियान में खासी मदद देगा। संयुक्त राष्ट्र ने विश्व विरासत स्थल दरबार चौक और धरहरा इमारत के जमींदोज होने पर चिंता भी जताई है।