भूकंप के झटकों ने याद दिलाई नेपाल की तबाही
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बीते 25 अप्रैल को नेपाल और भारत में आए भूकंप की दहशत से लोग उबरे भी नहीं
नेपाल में पांच माह के अंदर ही भूकंप के छोटे बड़े सौ से ज्यादा झटके आ चुके हैं। खासकर 25 अप्रैल को आए भूकंप ने तो भारत के विश्वस्त पड़ोसी नेपाल में भयंकर तबाही मचाई थी। नेपाल में उस भूकंप से कम से कम आठ हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोग घायल हुए थे।
7.8 तीव्रता के भूकंप ने नेपाल में ऐसी तबाही मचाई थी कि उसके जख्म भरने में सालों लग जाएंगे। भूकंप की तीव्रता ऐसी थी कि नेपाल की सीमा से लगते भारत के बिहार में काफी नुकसान हुआ था।
विभिन्न इमारतों के क्षतिग्रस्त होने के कारण यहां भी आधा दर्जन लोगों की मौत हो गई थी। भूकंप ने सबसे ज्यादा नुकसान नेपाल की राजधानी काठमांडू को पहुंचाया था। जहां की सांस्कृतिक विरासत पूरी तरह भूकंप की भेंट चढ़ गई थी।
खत्म हो गई थी काठमांडू की सांस्कृतिक विरासत
आलम ये था कि कुछ सेकेंड के भूकंप ने सदियों से नेपाल की शान रही इन इमारतों को पलभर में मिट्टी में मिला दिया था। काठमांडू की शान रहे काष्ठमंडप और धरहरा टावर का तो अस्तित्व ही समाप्त हो गया था।
भूकंप की त्रासदी बीत जाने के बाद नेपाल में हर ओर बर्बादी का मंजर ही नजर आ रहा था। एक झटके में ही करीब 80 लाख लोग सड़कों पर आ चुके थे। इनमें से काफी लोगों ने तो भोजन न मिलने के कारण भूख के मारे तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया था।
उस स्थिति में नेपाल के पड़ोसी भारत और चीन सहित दुनियाभर के देशों ने दिल खोलकर उसकी मदद की थी। वहीं इसके चंद दिनों बाद ही 12 मई की दोपहर नेपाल को फिर भूकंप के झटकों को सहना पड़ा। उस भूकंप में भी 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी। उसके बाद से ही नेपाल को रह रहकर भूकंप का दंश झेलना पड़ रहा है।