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मौजूदा विवाह पिछली शादी के प्रमाण पत्र से अमान्य नहीं
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Wed, 19 Dec 2012 12:35 AM IST
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मौजूदा वैवाहिक संबंधों को अमान्य घोषित करने के लिए पिछले कथित विवाह का प्रमाण पत्र उस समय तक पर्याप्त आधार नहीं है, जब तक इस संबंध में आदेश पारित न हो जाए।
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न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने कहा कि विवाह अमान्य घोषित करने संबंधी डिक्री पारित होने तक अदालत यही मानकर कार्यवाही करेगी कि संबंधित पक्षों के बीच शादी जैसा रिश्ता है लेकिन विवाह की प्रकृति का नहीं है।
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पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट सहित किसी भी अदालत के लिए वैवाहिक हैसियत के बारे में पूरी तरह से और प्रभावी फैसले के लिए अपीलकर्ता की ओर से पहले विवाह के दावे के समर्थन में विशेष विवाह कानून, 1954 की धारा 13 के तहत जारी विवाह प्रमाण पत्र पेश करना ही काफी नहीं है।
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सर्वोच्च अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने पति की ओर से पेश किए गए पहले विवाह के प्रमाण पत्र के आधार पर महिला के विवाह को अमान्य घोषित कर दिया था।
यह महिला अपने पति से गुजारा भत्ता चाहती है और इसी को लेकर दंपति के बीच मुकदमा चल रहा है। निचली अदालत ने इस महिला को दो हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था जिसे उसके पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस याचिका के लंबित होने के दौरान ही उसने पहले कथित विवाह के आधार पर निचली अदालत का आदेश वापस लेने का अनुरोध किया था।
निचली अदालत ने जब उसे कोई राहत देने से इन्कार कर दिया तो इस व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल, 2010 को इस दंपति के विवाह को अमान्य घोषित कर दिया था जिसके बाद महिला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि महिला के पक्ष में गुजारा भत्ते के आदेश में अदालत का हस्तक्षेप न्यायोचित नहीं था।