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अब हर साल जारी होंगे एक करोड़ पासपोर्ट

Mon, 16 Sep 2013 08:36 AM IST
हिमांशु मिश्र/नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र/नई दिल्ली Updated Mon, 16 Sep 2013 08:36 AM IST
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each year one crore passport will make

साठ के दशक में प्रति वर्ष महज 30 हजार पासपोर्ट जारी होते थे। अब यह संख्या प्रति कार्य दिवस 40 हजार तक जा पहुंची है।

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विदेश मंत्रालय का लक्ष्य प्रति वर्ष हर हाल में एक करोड़ नए पासपोर्ट जारी करने का है।

इस अभियान में पुलिस सत्यापन की कछुआ चाल के कारण आ रही बाधा को दूर करने के लिए मंत्रालय जल्द ही सभी राज्यों के पुलिस प्रमुख से बात करने वाला है।

मंत्रालय की कोशिश है कि पासपोर्ट के लिए आवेदन देने वालों को 21 दिन से अधिक इंतजार न करना पड़े।

हालांकि अब भी मंत्रालय पुलिस सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद महज 15 दिनों में 90 फीसदी पासपोर्ट जारी कर रहा है। 73 फीसदी तत्काल पासपोर्ट तो महज तीन दिन में ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एआर घनश्याम के मुताबिक लोगों को जल्द से जल्द पासपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए मंत्रालय ने अपनी ओर से पूरी तैयारी की है। मगर पुलिस सत्यापन की धीमी गति से पासपोर्ट बनाने के अभियान में रुकावट आ रही है।
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हालत यह है कि महज 30 फीसदी पुलिस सत्यापन ही 21 दिनों के अंदर हो पा रही है, जबकि देशभर के 722 जिलों में से 344 जिले मंत्रालय की पासपोर्ट सेवा से सीधे जुड़े हुए हैं।
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बकौल घनश्याम समस्या पुलिस बलों की कमी का है। इनके पास पासपोर्ट सत्यापन के अलावा ढेरों काम हैं। अब मंत्रालय की योजना विभिन्न राज्यों के पुलिस प्रमुखों से बातचीत कर इसके लिए नया रास्ता निकालने की है।

मुख्य पासपोर्ट अधिकारी मुकेश परदेशी बताते हैं कि इस समय देश में लगभग पांच करोड़ लोगों के पास पासपोर्ट हैं। इनमें से दो करोड़ से अधिक पासपोर्ट तो महज बीते तीन साल में उपलब्ध कराए गए हैं।

बीते साल 77 लाख नए पासपोर्ट जारी किए गए, जबकि इस साल अगस्त तक 48.19 लाख पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। साल के अंत तक यह आंकड़ा 85 लाख तक पहुंचेगा।

वैसे मंत्रालय का लक्ष्य अगले साल से प्रतिवर्ष एक करोड़ नए पासपोर्ट जारी करने का है। तब तक लगभग सभी पुलिस जिले पासपोर्ट सेवा केंद्र से ऑनलाइन जुड़ चुके होंगे।

लगातार बढ़ रही है मांग
दरअसल आजादी से पहले और आजादी के बहुत बाद तक भारत में पासपोर्ट की मांग नहीं के बराबर थी। मगर 70 के दशक में जब दुनिया भर में तेल संकट गहरा गया तब मध्य पूर्वी देशों से मजदूरों की जबर्दस्त मांग बढ़ी।


उसके बाद नब्बे के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद पासपोर्ट के आवेदन में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई। इसी के मद्देनजर सरकार ने अलग से पासपोर्ट सेवा योजना शुरू की।

इसके तहत 77 नए पासपोर्ट सेवा केंद्र बनाए गए। मंत्रालय ने नेशनल कॉल सेंटर की भी स्थापना की है, जिस पर प्रति दिन 17 भाषाओं में 20 हजार कॉल आ रहे हैं।

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