ई-टिकट को लेकर रेलवे का बड़ा फैसला, अब नहीं होगी धोखाधड़ी
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ई-टिकट कैंसिलेशन के नाम पर हो रही दलालों की जालसाजी और कई चतुर मुसाफिरों की धोखाधड़ी पर रेलवे नकेल कसने जा रहा है। रेलवे ने ई टिकट निरस्तीकरण के नाम पर होने वाले ऑटोमैटिक रिफंड को बंद करने का फैसला कर लिया है। इस बारे में जल्द ही रेल मंत्रालय की ओर से फरमान जारी कर दिया जाएगा।
सफर शुरू होते ही मोबाइल और लैपटॉप के जरिए ई टिकट रद कराकर ऑटोमैटिक रिफंड अपनी जेब में डाल रेलवे को प्रति दिन भारी चूना लगाया जा रहा है। रेलवे ने पिछले कुछ माह की समीक्षा के दौरान पाया कि ई टिकट बुक करने वाले दलालों का एक बड़ा रैकेट बड़ी चतुराई से रेलवे को चूना लगा रहा है।
रेलवे बोर्ड के मेंबर ट्रैफिक एके शुक्ला बताते हैं कि इस जालसाजी को रोकने के लिए ही ऑटोमैटिक रिफंड को बंद किया जा रहा है। अब ट्रेन छूटने से दो से तीन घंटे पहले बनने वाले रिजर्वेशन चार्ट के बाद ई टिकट कैंसिलेशन पर ऑटोमैटिक रिफंड नहीं होगा।
ऐसे लगाया जा रहा था चूना
किसी सही यात्री को इससे असुविधा का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए ई टिकट कैंसिलेशन पर रिफंड की व्यवस्था रेलवे काउंटर पर की जाएगी। शुक्ला बताते हैं कि इसी तरह कैंसर मरीजों के नाम पर दलाल छोटे अस्पतालों से फर्जी कैंसर मरीज का सर्टीफिकेट बनवाकर 50 प्रतिशत छूट का फायदा उठा रहे हैं। इसे रोकने के लिए रेलवे कैंसर मरीजों को यूनीक आईडी नंबर देगा।
दलाल की ओर से मुसाफिर को ई-टिकट देने के बाद जैसे ही रिजर्वेशन चार्ट में उसका नाम चढ़ता था, उसके बाद या फिर ट्रेन छूटने के बाद उस टिकट को रद कर दिया जाता था, जिससे उसका 20 से 50 प्रतिशत का ऑटोमैटिक रिफंड दलाल के खाते में आ जाता था।
यही नहीं कई मुसाफिर भी इस घटना को आसानी से अंजाम दे रहे थे। यात्रा शुरू होते ही अपने मोबाइल या लैपटॉप से ई टिकट को रद कर दिया जाता था।