मोदी सरकार में 'शहजादों' को जगह नहीं
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सोमवार यानी 26 मई को नरेंद्र मोदी ने देश के 15वें प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही उनके मंत्रीमंडल के 44 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण किया। लेकिन नई सरकार में यूपीए सरकार की तुलना कई खास बातें देखने को मिली।
नए मंत्रीमंडल में वंशवाद पर लगाम लगाने की कोशिश की गई है। जहां यूपीए सरकार के दौरान वंशवाद की खासी झलक देखने को मिल रही थी। कई सांसदों को पारिवारिक विरासत के चलते मंत्रीमंडल में शामिल किया गया।
इनमें दीपेंद्र हुड्डा, सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद जैसे नाम शामिल हैं। जिन्हें मनमोहन सरकार में कई अहम पद दिए गए।
मोदी मंत्रीमंडल में दिखा बदलाव
इन सबसे अलग मोदी सरकार में इस बात का खास ख्याल रखा गया है। नई सरकार में 'शहजादे' मंत्रियों को खास प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। ऐसा नहीं की बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों में ऐसे सांसदों कमी रही हो।
करीब दर्जनभर सांसद ऐसे हैं, जो राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन मोदी की कैबिनेट में अभी केवल दो ऐसे मंत्री हैं जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है।
इनमें से अकाली दल की हरिसिमरत कौर और पीयूष गोयल को सरकार में जगह मिल पाई है। इसमें भी पीयूष गोयल पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे हैं और पूर्व शिपिंग मंत्री वेदप्रकाश गोयल के बेटे हैं।
यहां ये जानना भी जरूरी है कि पीयूष को मंत्रीमंडल में शामिल करने की घटना को वंशवाद से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। पीयूष पिछले 27 साल से पार्टी-संगठन में काम कर रहे हैं। दूसरी ओर अकाली दल की हरसिमरत कौर पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हैं।
कई बड़े नामों को मौका नहीं
इनके अलावा भी बीजेपी समेत एनडीए में कई ऐसे बड़े नाम हैं जिन्हें नई सरकार में प्रतिनिधित्व का इंतजार था। इनमें पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का नाम सबसे अव्वल है।
इसके साथ ही राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बेटे दुष्यंत सिंह भी हैं, जो झालवाड़-बारां लोकसभा सीट से जीत कर आए हैं। इसके अलावा राजस्थान में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए राज्य की सभी 25 सीटों पर कब्जा किया है।
इसके बाद भी मोदी मंत्रीमंडल में राजस्थान से निहालचंद मेघवाल को ही जगह दी गई है। उन्हें राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है।
सरकार में इन्हें नहीं मिली जगह
ऐसे ही बीजेपी नेता मेनका गांधी के बेटे वरूण गांधी भी इस लिस्ट में शामिल हैं। वरूण उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से सांसद चुनकर आएं हैं, उन्हें भी मोदी कैबिनेट से बाहर रखा गया। हालांकि, मेनका गांधी ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजबीर सिंह और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा को भी मोदी कैबिनट में जगह नहीं मिली।
बात करें हिमाचल प्रदेश की तो यहां से पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर भी मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं सके हैं। अनुराग हिमाचल के हमीरपुर से सांसद चुने गए हैं और वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं।
हिमाचल प्रदेश में बीजेपी को सभी चार सीटों पर जीत मिली है, लेकिन यहां के किसी सांसद को मोदी कैबिनेट में जगह नहीं मिली है।
तो इसलिए मोदी ने लिया ये फैसला
ऐसे ही बिहार की बात करें तो यहां एलजेपी के मुखिया रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं। हालांकि रामविलास पासवान को नई कैबिनेट में जगह मिली है।
मोदी मंत्रीमंडल की तस्वीर देखकर जो बात उभर कर सामने उसे समझें तो यही लगता है कि मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान वंशवाद पर जमकर निशाना साधा था। मोदी ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी को 'शहजादे' कहकर यूपीए सरकार पर वंशवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे।
ऐसे में जब उन्हें नई सरकार के गठन का मौका मिला तो उनकी कोशिश यही रही कि कम से कम उन्हें कोई इस मामले में नहीं घेर सके।