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DU-UGC विवाद: मुश्किल में अफसर

Tue, 24 Jun 2014 08:10 AM IST
Updated Tue, 24 Jun 2014 08:10 AM IST
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DU-UGC controversy: have returned to haunt the lives of officers

दिल्ली विश्वविद्यालय में चार साल के अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम (एफवाईयूपी) को लागू करने व निरस्त करने की लड़ाई ने यूजीसी तथा मानव संसाधन मंत्रालय के अफसरों की जान को सांसत डाल दिया है। यही अफसर एक महीने पहले तक जिस एफवाईयूपी से न केवल सहमत थे बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के नाम पर फैसले का बचाव भी करते थे, वही आज नई मंत्री के दबाव में फैसले को असंवैधानिक बता रहे हैं।

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यूजीसी के अधिकारी फैसले को निरस्त कराने के लिए खुद अपनी सीमाओं का उल्लंघन कर दिल्ली विश्वविद्यालय के कालेजों को सीधे प्रवेश प्रक्रिया रोकने की सलाह दे रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू करना नियम विरुद्ध है या अनुकूल छात्रों के लिए उपयोगी अथवा अनुपयोगी, अब यह सवाल बेमानी है। कोई भी पक्ष इस पर बात करना भी नहीं चाहता है।

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कांग्रेस शासन में सब इसके विरोध में

DU-UGC controversy: have returned to haunt the lives of officers

कांग्रेस के शासन में जब यह लागू हो रहा था तो भाजपा ने इसका विरोध किया था। उस समय तमाम यूनियनों चाहे वे छात्र यूनियन हों या शिक्षक यूनियन, उनमें भी मतभेद व विरोध थे, लेकिन तब इस पाठ्यक्रम के गुण व दोष पर बहस हो रही थी।

आज एक साल बाद यह नाक की लड़ाई बन चुकी है। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी का शायद यह सबसे पहला बड़ा फैसला है।

सीधे मंत्रालय दखल नहीं दे सकता, इसलिए यूजीसी की बांह मरोड़ी गई कि वह एफवाईयूपी कोर्स को निरस्त कराये। कहने को यूजीसी भी दिल्ली विश्वविद्यालय की तरह स्वायत्त संस्था है, लेकिन सभी जानते हैं कि यहां मंत्रालय या मंत्री की इच्छा के विरुद्ध पत्ता तक नहीं हिलता है।

स्मृति ईरानी ने लगाया पूरा जोर!

DU-UGC controversy: have returned to haunt the lives of officers

यूजीसी व मंत्रालय के अफसर जानते हैं कि विश्वविद्यालय जैसे स्वायत्तशासी संस्थान कैसे चलते हैं। उनके फैसलों को शास्त्री भवन में बैठकर नहीं पलटा जा सकता है, लेकिन मानव संसाधन मंत्री से सीधे लहजे में कहने की हिम्मत कौन करे।

मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी भी ऑन द रिकार्ड भले यह कहती हैं कि एफवाईयूपी मामले में यूजीसी फैसला ले रहा है, लेकिन ऑफ द रिकार्ड वे एफवाईयूपी को तत्काल निरस्त कराने के लिए एड़ी चोटी को जोर लगाए हुए हैं।

अधिकारी अपनी सीमायें जानते हैं, फिर भी वे डीयू को आदेश पर आदेश दे रहे हैं, लेकिन अड़ियल कुलपति दिनेश सिंह के सामने उनकी एक भी नहीं चल रही है।

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