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प्यार, ड्रग और मर्डर: चौंकाने वाली है पाक आतंकी की कहानी

Tue, 01 Sep 2015 01:00 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 01 Sep 2015 01:00 PM IST
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ड्रग, प्यार और मर्डर। किसी आंतकी के जिहाद का सफर इन रास्तों से भी तय होता है। 2009 में सज्जाद अहमद जेल की कोठरियों से बाहर आया। जिसके बाद वो प्यार में पड़ गया लेकिन उसने उस महिला को मौत के घाट उतार दिया क्योंकि उसने एक स्थानीय बाशिंदे से शादी कर ली।

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इस महिला की हत्या करने के बाद सज्जाद दोबारा प्यार में पड़ा लेकिन इस बार उसे प्यार किसी लड़की से नहीं बल्कि भूरे रंग के टाक्सिक पॉउडर से प्यार हुआ, जिसने पाकिस्तान तके दक्षिणी पंजाब के कई युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। इसके बाद सज्जाद को जिससे सबसे ज्यादा प्यार हुआ वो ऐसा ताकतवर ड्रग था जिसके आगे वो पाउडर भी धीमा साबित हुआ और वो था 'जिहाद'।
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बीते हफ्ते सज्जाद का सफर एक और जेल में आकर खत्म हो गया और इस बार जगह पाकिस्तान नहीं बल्कि श्रीनगर है जहां उसे भारतीय सेना के समक्ष सरेंडर करने के बाद ले जाया गया। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सज्जाद का जन्म 1992 में फैज बख्श के परिवार में हुआ।
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नहीं मिला पढ़ाई का मौका

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फैज किसान थे लेकिन उनके पास अपनी जमीन नहीं थी। सज्जाद अपने चार भाइयों और एक बहन के बीच तीसरा लड़का था। अपने अन्य भाइयों की तरह सज्जाद को ज्यादा पढ़ने लिखने का मौका नहीं मिला। म्यूनिसिपल स्कूल में पढ़ने के दौरान चौथी क्लास में ही सज्जाद ने स्कूल से अपना नाता तोड़ लिया।

10 साल की उम्र में वो अपने बड़े भाई जावेद इकबाल के साथ काम पर लग गया और जमींदारों के जानवरों को चराने का काम करता था। किशोरावस्था में सभी भाई काम की तलाश में रावलपिण्डी की ओर गए और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम ढूंढ़ने लगे। जिसके बाद उन्हें काम भी मिल गया और सज्जाद ने वहां रह कर 2 महीने रहकर ट्रक कण्डक्टर की नौकरी भी की।

कोट अड्डू के एक निवासी ने बताया कि वो अपनी नौकरी से नफरत करता था। ट्रक पर जो लड़़के काम करते थे, उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जाता था। वहां के स्थानीय निवासियों के मुताबिक सज्जाद के साथ जो बर्ताव किया जाता था वो उसका खासा विरोध करता था, वहीं उसके भाई ऐसा कुछ नहीं करते थे।

13 महीने की जेल

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कभी छोटे मोटे गुण्डे मवालियों के साथ घूमने वाले के तार धीरे-धीरे हिरोइन रैकेट और कई जमींदारों से जुड़ गए। 2008 की शुरुआत में सज्जाद का एक दोस्त मुहम्मद कासिम को जब यह पता चला कि उसके किसी गांव वाले ने उसकी बहन का यौन शोषण किया है। इसके बाद कासिम और सज्जाद ने एक ड्रग ट्रेडर की मदद से पिस्टल का इंतजाम किया और उस आरोपी को मार दिया।

फिर वो 13 महीनों तक जेल में रहा जब तक कि कासिम के परिवार वालों ने बेल पाने के लिए रिश्वत के पैसे नहीं दे दिए। रिकॉर्ड्स के मुताबिक 2011 में मुजफ्फरगढ़ सेशन कोर्ट ने सज्जाद के खिलाफ एक केस खत्म कर दिया क्योंकि उसे सज्जाद के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला और उसे बरी भी कर दिया गया।

इलाके के लोगों के मुताबिक इसी केस ने सज्जाद की जिंदगी को बड़ा मोड़ दिया। केवल 16 साल की उम्र में सज्जाद को जेल में रखा गया। जब वो जेल से बाहर आया तो उसने हजिरा माई से शादी की। लेकिन हजिरा के परिवार वालों को सज्जाद की क्रिमिनल लाइफ पसंद नहीं आई और उन्होंने अपनी बेटी की शादी एक अन्य स्थानीय लड़के से कर दी।

नियाज ने बदला दिमाग!

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सज्जाद को हजिरा के परिवार का फैसला पसंद नहीं आया और उसने हजिरा की हत्या कर दिया था। हजिरा की हत्या करने के तीन साल बाद तक सज्जाद सड़कों के किनारे रहने लगा, और छोटे-मोटे अपराध करता था। स्थानीय निवासियों के मुताबिक इसी वक्त वो ड्रग्स का आदी हो गया।

2012 में जांच रिकॉर्ड्स के अनुसार सज्जाद नियाज भाई के पास गया, जो जमात उत दावा का उपदेशक था। नियाज भाई ने जिहाद पर जो उपदेश दिए उन्हें सुनकर सज्जाद को उद्देश्य की भावना दी। उपदेशक ने सज्जाद से यह भी वादा किया था वो भाईचारे का एक नया रास्ता बनाएगा, जहां सभी एक होंगे, और सभी के जीवन का एक ही लक्ष्य होगा।

जांच अधिकारियों के मुताबिक 2012 के दौरान सज्जाद को एक जिहाद ट्रेनिंग कैम्प ले जाया गया, जहां उसे राइफल, बंदूकों और ग्रेनेड्स चलाने की ट्रेनिंग दी गई। जिसके बाद वो अपने कोर्स को पूरा करने के दौरा-ए-शुफा जिसे दिसंबर 2012 में पूरा किया और दौरा-ए-खास 2013 की गर्मियों में पूरा कर लिया।

पहले भी की थी घुसपैठ की कोशिश

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अपनी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वो लड़ाई के लिए पूरी तरह से तैयार था। 2013 की गर्मियों में सज्जाद ने एक ग्रुप ज्वाइन किया जो लाइन ऑफ कंट्रोल पार करने वाला था, लेकिन सेना की पेट्रोलिंग ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया और वो वापस लौट गया।

सज्जाद ने जून 2015 में एक अन्य ग्रुप ज्वाइन किया ताकि वो लाइन ऑफ कंट्रोल पार सके। स्थानीय निवासी कहते हैं कि जब सज्जाद के परिवार वालों को उसकी गिरफ्तारी की खबर मिली तो उन्होंने बहुत रुखेपन से जवाब दिया।

सज्जाद के परिवार वाले आज भी अपना जीवन मुश्किल से व्यतीत कर रहे हैं। सबसे बड़ा भाई, जावेद इकबाल आज भी ट्रक पर काम करता है। मो0 असलम रिक्शा चलाता है जिससे वो अपनी पत्नी और तीन बच्चों को पालता है।

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