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मंत्रियों को हटाना सोनिया-पीएम का फैसला
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sun, 12 May 2013 07:20 PM IST
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दो मंत्रियों पवन कुमार बंसल और अश्विनी कुमार की कैबिनेट से विदाई के दो दिन बाद कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का संयुक्त फैसला बताया है।
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पार्टी ने कहा है कि मंत्रियों के इस्तीफे सोनिया के जोर देने के बाद नहीं लिए गए।
पार्टी ने यह सफाई तब दी है जब इन मंत्रियों को हटाने में हुई देरी के बाद न केवल प्रधानमंत्री की निर्णय क्षमता पर सवाल उठने शुरू हुए, बल्कि प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच मतभेद की भी चर्चा शुरू हुई।
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माना जा रहा है कि पार्टी अब अपने स्तर पर पूरे मामले में हुए नुकसान की भरपाई में जुट गई है।
कांग्रेस महासचिव तथा मीडिया विभाग के प्रमुख जनार्दन द्विवेदी ने रविवार को कहा कि मीडिया के एक हिस्से में यह खबर आई है कि दोनों मंत्रियों के इस्तीफे कांग्रेस अध्यक्ष के जोर देने के बाद हुए। यह सच नहीं है।
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सच्चाई यह है कि दोनों मंत्रियों को हटाने का फैसला प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष ने मिलकर लिया। द्विवेदी ने इस मामले में प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच मतभेद संबंधी खबरों को भी खारिज कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी और सरकार के बीच बढ़ती दूरी संबंधी चर्चाओं को भी फिजूल करार दिया।
उल्लेखनीय है कि रेलवे में पदोन्नति के लिए रिश्वत तथा कोलगेट मामले में सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट में की गई छेड़छाड़ के मामले में फंसे बंसल और अश्वनी पर कई दौर की बैठकों और माथापच्ची के बाद भी सरकार कोई निर्णय नहीं ले पा रही थी।
इन मामलों के तूल पकड़ने के कारण संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में कोई कामकाज नहीं हो पाया। हंगामे के कारण सरकार अपने गेमचेंजर भूमि अधिग्रहण और खाद्य सुरक्षा विधेयक को भी कानूनी जामा नहीं पहना पाई।
चूंकि विवादों में घिरे बंसल और अश्वनी कुमार को प्रधानमंत्री का करीबी माना जाता है, इसलिए इन चर्चाओं ने भी जोर पकड़ा कि सरकार जानबूझ कर जल्दी फैसला करने के बदले मामले को टाल रही है।
सत्र के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री की एक ही मुलाकात में दोनों मंत्रियों की छुट्टी हो जाने के बाद इस आशय का स्पष्ट संकेत गया कि सरकार को पार्टी खासकर सोनिया के दबाव में अपने दोनों मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी मंत्रियों की विदाई कांग्रेस अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद ही सुनिश्चित हुई थी। इसलिए प्रधानमंत्री की निर्णय क्षमता पर नए सिरे से सवाल उठने शुरू हुए। इसको देखते हुए मंत्रियों की विदाई के दो दिन बाद द्विवेदी की आई सफाई को पार्टी की ओर से शुरू हुए डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।