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भूकंप के दौरान हुए इस चमत्कार को पढ़ कर आप खुश होंगे

Thu, 30 Apr 2015 08:07 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 30 Apr 2015 08:07 AM IST
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Drop from 203 feet but still alive

भयानक भूकंप में 203 फीट की ऊंचाई से गिर कर भी जिन्दा बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। नेपाल की तबाही में 5000 हजार से अधिक जानें चली गईं लेकिन ईश्वर जिसको चाहता है उसे कठिन से कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जिन्दा रखता है। कृष्ण रामतर के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।

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तबाही वाले दिन 17 वर्षीय कृष्णा रामतर भी काठमांडू शहर का नजारा देखने के लिए टॉवर के आठवें फ्लोर पर चढ़े थे, लेकिन भूकंप में धरहरा टॉवर नेस्तनाबूत हो गया जिसकी बालकनी से पूरी काठमांडू वैली दिखाई देती थी। कृष्षा ने कहा कि ईश्वर ने उनकी जान बचा ली। उनको दोबारा जीवनदान मिल गया, जिसके बाद से ईश्वर में उनका विश्वास और भी ज्यादा बढ़ गया है।

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खुशी मनाएं या दुख

Drop from 203 feet but still alive

कृष्णा को जब भी मौका मिलता था, वो काठमांडू का नजारा देखने के लिए टॉवर पर चले जाते थे। कृष्णा और उनका परिवार ईश्वर का शुक्रिया अदा कर रहा है। कृष्णा ने बताया कि उनका दोस्त संजीव भी उनके साथ टॉवर पर गया था, खुशकिस्मती से वो भी बच गया । उन्होंने कहा कि वो 203 फीट के टॉवर के मलबे के नीचे दफन हो गये थे। कृष्णा के मुताबिक वो और संजीव भूकंप आने से पहले टॉवर की आठवीं मंजिल से फोटो क्लिक कर रहे थे।

फोटो खींचने के दौरान ही अचानक से कंपन शुरू हुआ और सब कुछ बिखर गया। हम लोग कहां जायें ,क्या करें, कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। हम बहुत ज्यादा ऊंचाई पर थे, और गिरने के बाद हमें अस्पताल में ही होश आया है। कृष्णा कहते हैं कि किस्मत ने उनके साथ दोहरा खेल खेला है। उन्हें तो बचा लिया लेकिन इस भूकंप ने उनकी बहन और सास को उनसे छीन लिया।

पत्नी अदा कर रही है भगवान का शुक्रिया

Drop from 203 feet but still alive

कृष्णा की पत्नी ने भी भगवान को उनका सुहाग जिन्दा रखने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया है। कृष्णा के दोस्त संजीव भी उसी अस्पताल में भर्ती हैं।

आपको बता दें कि धरहरा टॉवर यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त पर्यटन स्थलों में से एक था जो नेपाल के भूकंप में तबाह हो गया। इस टॉवर को उस समय के प्रधानमंत्री भीमसेन थापा ने बनावाया था। 1934 में भी भूकंप ने इसकी संरचना को तबाह कर दिया था, जिसके बाद नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुद्धा शमसेर ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था। भूकंप वाले दिन लगभग 100 लोगों ने टिकट खरीदे थे, जिनमें से केवल आधे लोगों के ही जिन्दा होने की खबर है।

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