'अंगूठा लेने वाले द्रोणाचार्य पर पुरस्कार क्यों?'
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गुरू-शिष्य परंपरा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण मानते हुए गुरू द्रोणाचार्य के नाम पर खेल प्रशिक्षकों को दिया जाने वाला द्रोणाचार्य अवार्ड देश के हर कोच का सपना होता है। लेकिन संसद में मंगलववार को यह सवाल खड़ा कर दिया गया कि खेल प्रशिक्षकों को गुरू द्रोणाचार्य के नाम पर अवार्ड क्यों दिया जा रहा है।
पलक्कड़ से माकपा सांसद एमबी राजेश ने खेल मंत्री से जब यह सवाल पूछा तो उनका तर्क था कि उन्हें इस बात से कोई गुरेज नहीं है कि द्रोणाचार्य के एक महान गुरू थे, लेकिन वह ऐसे गुरू थे जिन्होंने अपने शिष्य से ही गुरू दक्षिणा के नाम पर अंगूठा मांग लिया था।
सांसद का इतना कहना था कि भाजपा सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। यहां तक लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी इस पर एतराज जताते हुए कहा कि यह कैसा प्रश्न है?
योगी आदित्यनाथ ने दी प्रतिक्रिया
राजेश ने संसद में प्रश्न काल के दौरान उस वक्त यह सवाल उठाया जब अर्जुन अवार्ड के संबंध में खेल मंत्री सर्वानंद सोनोवाल से प्रश्न किए जा रहे थे। राजेश ने महाभारत का हवाला देते हुए एकलव्य की घटना का जिक्र करते हुए उनके नाम पर यह अवार्ड दिए जाने पर सवालिया निशान लगाए।
उनके इस सवाल पर सबसे ज्यादा गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया की। स्पीकर ने भी जब उनसे कहा कि यह प्रश्न नहीं बनता है तो राजेश ने कहा कि उनके राज्य में कई लोगों ने इस तरह के प्रस्ताव भेजे हैं कि ऐसे गुरू के नाम पर अवार्ड नहीं रखना चाहिए जिसने अपने शिष्य से ही उसका अंगूठा मांग लिया था।
जब राजेश अड़ गए कि उन्हें खेल मंत्री से यही जवाब चाहिए कि वह द्रोणाचार्य अवार्ड का नाम बदलेंगे कि नहीं, इस पर खेल मंत्री ने जवाब दिया कि उन्हें अब तक इस तरह का कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।