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मेरठ: यहां हर घर है बीमार, हर दिल में है एक ही दर्द

Fri, 06 Nov 2015 06:27 AM IST
Updated Fri, 06 Nov 2015 06:27 AM IST
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Drinking water claimed poisonous in many districts of the West UP.

पश्चिम के कई जिलों में पीने का पानी जहरीला होने के कारण सैकड़ों जानें जा चुकी हैं, हजारों लोग बीमार हैं। काली नदी के प्रदूषण के कारण मुजफ्फरनगर से मेरठ तक कई गांवों में लोगों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।

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मीट प्लांटों के अलावा पेपर इंडस्ट्री, चर्म शोधन इकाइयां, शुगर इंडस्ट्री, स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री जैसे उद्योगों में भी प्रदूषण के मानकों का पालन न होने के कारण पेयजल दूषित हो रहा है।
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मेरठ में कैंसर की चपेट में लोग
काली नदी में दूषित पानी की वजह से इन गांवों में लोग बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। काली नदी के किनारे बसे गांवों में भी बीमारी का यही हाल है। दौराला ब्लॉक के पनवाड़ी, अझौता, देदवा, इकलौता, खेड़ी, समौली, भराला, जलालपुर, उलखपुर आदि कई गांव, जो काली नदी के किनारे बसे हैं उनमें कैंसर सहित दूसरी बीमारियों ने लोगों को अपनी चपेट में लिया है।
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मेरठ में कैंसर से हो चुकी हैं कई मौतें

Drinking water claimed poisonous in many districts of the West UP.

सबसे ज्यादा मौतें देदवा में हुई हैं। यहां पर करीब 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। जबकि पनवाड़ी, अझौता, इकलौता, समौली व खेड़ी गांवों की बात करें तो यहां भी कैंसर और अन्य बीमारियों से काफी संख्या में मौत हो चुकी हैं।

इसके अलावा गांव धंजू, कौल, कुझला, अतराड़ा, दौराला, अजोहटा, नंगली, कस्तला, जयभीम नगर, दुल्हेड़ा, पल्हेड़ा, पिथोलकर, पूठी, खजूरी, नंगलामल, कलीना, किनौनी, रसूलपुर, डूंगर, पूठखास, पूठी, बहलोलपुर, सठला, खरखौदा, गेसुपुर, भदौली, माडरा, कुढ़ला, मऊखास, भटीपुरा, माछरा, रजपुरा, सैनी, बना, मसूरी, फिटकरी, कमालपुर, धीरखेड़ा, हाजीपुर, खरखौदा, कैली आदि गांव ऐसे हैं, जिनमें पेयजल की स्थिति औद्योगिक इकाईयों और काली नदी के कारण काफी खराब है। वहीं, सेंटर फॉर एनवायरमेंटल साइंस के सर्वे में भी मेरठ के जल में नाइट्रेट और आयरन की काफी अधिक मात्रा मिली है।

मुजफ्फरनगर में नदियों में जा रहा प्रदूषित पानी
मुजफ्फरनगर में काली नदी के पास के गांवों की स्थिति काफी खराब है। मंसूरपुर क्षेत्र के पास के गांवों के लोग कैंसर, चर्म रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। पेपर, लोहा फैक्ट्रियों और केमिकल इंडस्ट्री से निकलने वाला जहरीला पानी नालों के जरिये काली नदी में जा रहा है।

मंसूरपुर के पास एक दर्जन गांव ऐसे हैं, जिनमें पानी की विकट समस्या है। इन गांवों के घरों में लगे नल दूषित जल आने के कारण बंद कर दिए गए हैं। सरकारी हैंडपंप से लोग पानी पी रहे हैं। भूगर्भ जल दूषित होने के कारण अब हैंडपंप की स्थिति भी अच्छी नहीं रही। जल निगम भी मानक के अनुसार हैंडपंप नहीं लगा रहा है।

सहारनपुर में भी हिंडन और काली का कहर

Drinking water claimed poisonous in many districts of the West UP.

जिले में हिंडन और काली नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के हर घर में बीमारी है। जिसका कारण दूषित पेयजल माना जा रहा है। नदियों के प्रदूषित जल के कारण चर्म रोग, आंतों के रोग, लीवर रोग, कैंसर सहित अन्य कई गंभीर बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं।

प्रशासन ने दूषित पेयजल दे रहे करीब 30 हैंडपंपों को चिह्नित किया है और लोगों को सचेत करने के लिए उसको मार्क भी किया है। मगर, विकल्प नहीं होने की वजह से ग्रामीण उन्हीं हैंडपंप के भरोसे हैं।

हालांकि जिले में करीब 150 हैंडपंप सील होने की स्थिति में हैं। डीएम पवन कुमार कहते हैं कि जिन गांवों में हैंडपंप का जल दूषित हो चुका है, उन्हें सील करने का अभियान चल रहा है।

बागपत में चल रहा है चिन्हीकरण

Drinking water claimed poisonous in many districts of the West UP.

दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डॉक्टर चंद्रवीर सिंह की याचिका पर चल रही एनजीटी में सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने पांच अगस्त को दिए गए आदेश का पालन नहीं किए जाने पर यूपी सरकार एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आड़े हाथों लिया। एनजीटी ने जिले में प्रदूषित पानी दे रहे हैंडपंपों को सील करने के निर्देश प्रशासन को दिए हैं।

एनजीटी ने प्रशासन को प्रभावित गांवों तक शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में डीएम नरेंद्र शंकर पांडेय ने सीडीओ की अध्यक्षता में जल निगम एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की कमेटी गठित करने के आदेश भी जारी कर दिए हैं। मुख्य विकास अधिकारी जेपी रस्तोगी ने कहा कि 10 हैंडपंपों को चिन्हित कर पहले ही लाल पेंट करा दिया गया है।

शामली में जहरीला पानी पीने को मजबूर लोग
शामली जिले में हिंडन और कृष्णा नदी के किनारे बसे गांवों के हैंडपंपों में दूषित पेयजल आने से लोग त्रस्त हैं। इनके आसपास बसे गांवों में इंसान ही नहीं, जानवरों तक का अस्तित्व खतरे में है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले से इन गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है। विषैला पानी पीने के कारण इन गांवों में बीमारियां फैल रही हैं। पूर्व में इन बीमारियों के कारण कई मौतें भी हो चुकी हैं।

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