फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   dowry law misused by disgruntled housewives says supreme court

'पतियों के खिलाफ दहेज कानून का दुरूपयोग कर रहीं पत्नियां'

Thu, 03 Jul 2014 05:59 PM IST
Updated Thu, 03 Jul 2014 05:59 PM IST
विज्ञापन
dowry law misused by disgruntled housewives says supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज विरोधी कानून के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा कि पुलिस ऐसे मामलों में स्वत: आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकती।

विज्ञापन


असंतुष्ट पत्नियों द्वारा पति और ससुराल के लोगों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने के मामलों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को ऐसा करने के पीछे कारण बताना होगा, जिसका न्यायिक परीक्षण किया जाएगा।
विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने कहा कि पहले गिरफ्तारी और फिर कार्यवाही निंदनीय है, जिस पर निश्चिततौर पर रोक लगनी चाहिए। इसके लिए सभी राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दहेज उत्पीड़न सहित सात वर्ष तक की सजा वाले सभी अपराधों में गिरफ्तारी का सहारा न लिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

'दहेज उत्पीड़न के मामले में स्वत: गिरफ्तारी न करें'

dowry law misused by disgruntled housewives says supreme court

जस्टिस सीके प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि वे सभी राज्य सरकारों से पुलिस अधिकारियों को निर्देश देने का आदेश देते हैं कि पुलिस आईपीसी की धारा 498-ए (दहेज उत्पीड़न) के मामले में स्वत: गिरफ्तारी न करें।

बल्कि वे (पुलिस अधिकारी) सीआरपीसी की धारा 41 के प्रावधानों के अनुसार गिरफ्तारी की जरूरत महसूस होने पर ही ऐसा करें।

खंडपीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने पुलिस को गिरफ्तारी के कारणों के बारे में बताना होगा। अदालत ने कहा कि आईपीसी की धारा 498-ए एक गंभीर और गैरजमानती अपराध है, जिसे असंतुष्ट पत्नियां अपने पति के खिलाफ एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।

'दहेज कानून पति को प्रताड़ित करना आसान तरीका है'

dowry law misused by disgruntled housewives says supreme court

खंडपीठ ने कहा कि पति और उसके रिश्तेदारों को प्रताड़ित करना एक बेहद आसान तरीका है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें बेड पर पड़े रहने वाले पति के दादा-दादी, वर्षों से विदेश में रह रही उसकी बहनों को आरोपी बना दिया जाता है।

पीठ ने कहा कि यदि संबंधित पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से इस मामले में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रहता है तो उसके खिलाफ अदालत की अवमानना या विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

पीठ ने कहा है कि आजादी के छह दशक बाद भी पुलिस अपनी छवि नहीं बदल सकी है और गिरफ्तारी को बड़े स्तर पर उत्पीड़न या अत्याचार के हथियार के रूप में प्रयोग किया जाता है।

जताया दहेज उत्पीड़न के बढ़ते मामलों पर आश्चर्य

dowry law misused by disgruntled housewives says supreme court

शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि हमारा मानना है कि गिरफ्तारी तभी नहीं होनी चाहिए, जबकि अपराध गैर-जमानती हो या संज्ञेय हो, बल्कि ऐसे में पुलिस अधिकारी को कानून के दायरे में ऐसा निर्णय लेना चाहिए।

पीठ ने इस मामले में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का भी हवाला दिया।

498-ए और अन्य दहेज उत्पीड़न के मामलों के अपराध की बड़ी संख्‍या पर आश्चर्य जताया। पीठ ने कहा ये प्रावधान मौजूदा समय हथियारों की तरह प्रयोग में लाए जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed