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कांग्रेस-रालोद की दुबारा दोस्ती पर संशय के बादल
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
Updated Mon, 02 Sep 2013 12:03 AM IST
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छोटे चौधरी के नाम से मशहूर केंद्रीय उड्डयन मंत्री अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) भले ही यूपीए सरकार का हिस्सा है, लेकिन अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस रालोद के साथ दुबारा रिश्ता बनाएगी अथवा नहीं, इस बात को लेकर संशय है।
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दरअसल, कांग्रेस का आकलन है कि उत्तर प्रदेश में रालोद का जनाधार लगातार घट रहा है। अजित सिंह और उनके बेटे जयंत सिंह समेत पार्टी के सिर्फ तीन ही सांसद रह गए हैं।
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बाकी दो सांसदों ने सपा का दामन थाम लिया है। ऐसे में कांग्रेस में रालोद से दुबारा गठजोड़ के मुद्दे पर फिर से विचार का दबाव बढ़ता जा रहा है।
लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने यूपी में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही गठबंधन के समीकरणों पर भी विचार शुरू कर दी है।
प्रदेश के प्रभारी कांग्रेस महासचिव मधुसूदन मिस्त्री ने उम्मीदवारों के चयन के साथ ही रालोद समेत दूसरे छोटे दलों के प्रभाव के बारे में जानने के लिए आठ चुनावी पर्यवेक्षकों को प्रदेश में भेजा था।
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पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और खुद के आकलन के बाद से कांग्रेस के शीर्ष स्तर पर यह विचार बन रहा है कि रालोद अपने गढ़ में कमजोर पड़ रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी पार्टी की जड़े कमजोर पड़ रही हैं। पांच में से दो सांसदों के बाहर जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि रालोद का जनाधार सिकुड़ रहा है।
पार्टी के एक शीर्ष पदाधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि यह जरूरी नहीं कि रालोद के साथ दुबारा गठबंधन किया जाए। पार्टी सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला लेगी।
रालोद के अलावा अपना दल, पीस पार्टी समेत तमाम दलों के आधार पर भी कांग्रेस की नजर है।
सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी प्रदेश की सभी 80 सीटों पर अपना उम्मीदवार चाहते हैं। ऐसे में गठबंधन की संभावना कम ही है। मगर इससे पहले जमीनी हकीकत को ध्यान रखने की बात है।